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नवजात शिशुओं के लिए विटामिन डी: आवश्यकताएँ और सलाह

इस लेख में नवजात शिशुओं के लिए विटामिन डी की आवश्यकता और सप्लीमेंट देने की सलाह पर चर्चा की गई है। जानें कि कब और कितनी मात्रा में विटामिन डी देना चाहिए, और इसके कमी से होने वाली समस्याओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त करें। डॉक्टर की सलाह के महत्व को समझें और अपने बच्चे के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
 

विटामिन डी का महत्व


विटामिन डी एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में सहायता करता है और हड्डियों को मजबूत बनाता है। इसे 'सनशाइन विटामिन' भी कहा जाता है, क्योंकि यह धूप के संपर्क में आने से शरीर में बनता है। नवजात और छोटे बच्चों के लिए विटामिन डी अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इस उम्र में उनकी हड्डियाँ और दांत तेजी से विकसित होते हैं। यदि इस समय विटामिन डी की कमी हो, तो हड्डियों का विकास प्रभावित हो सकता है।


कई बार केवल मां के दूध से बच्चों को पर्याप्त विटामिन डी नहीं मिल पाता, इसलिए डॉक्टर इसकी सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं। विशेष रूप से उन बच्चों के लिए, जिन्हें धूप कम मिलती है या जो समय से पहले जन्मे हैं, विटामिन डी की आवश्यकता अधिक होती है। यह मजबूत इम्यूनिटी और सही शारीरिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।


बच्चों को विटामिन डी की सप्लीमेंट कब तक दें?

बच्चों को विटामिन डी की सप्लीमेंट कब तक दें?


डॉ. राकेश बागड़ी, पूर्व पीडियाट्रिक विभाग, एम्स के अनुसार, जन्म के कुछ दिनों के भीतर शिशु को विटामिन डी की सप्लीमेंट देना शुरू कर देना चाहिए। इसे कम से कम एक साल की उम्र तक जारी रखने की सलाह दी जाती है। यदि बच्चा पूरी तरह से ब्रेस्ट फीडिंग पर है, तो डॉक्टर एक वर्ष या उससे अधिक समय तक भी विटामिन डी देने की सलाह दे सकते हैं।


जिन बच्चों को फॉर्मूला मिल्क मिल रहा है, उनकी जरूरतें भिन्न हो सकती हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में, डॉक्टर दो साल तक भी सप्लीमेंट जारी रखने की सलाह दे सकते हैं। इसलिए, बच्चे की सेहत, धूप के संपर्क और आहार के आधार पर अवधि निर्धारित की जाती है।


विटामिन डी की कमी से होने वाली समस्याएँ

विटामिन डी की कमी से क्या समस्याएँ होती हैं?


बच्चों में विटामिन डी की कमी से रिकेट्स नामक बीमारी हो सकती है, जिसमें हड्डियाँ कमजोर और मुलायम हो जाती हैं। इसके लक्षणों में पैरों का टेढ़ा होना, हड्डियों में दर्द और विकास में देरी शामिल हैं।


दांत निकलने में देरी और मांसपेशियों की कमजोरी भी देखी जा सकती है। लंबे समय तक विटामिन डी की कमी रहने पर हड्डियों की संरचना प्रभावित हो सकती है।


डॉक्टर की सलाह का महत्व

डॉक्टर की सलाह जरूरी


बच्चों को कोई भी सप्लीमेंट देने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है। हर बच्चे की जरूरत अलग होती है, इसलिए खुराक और अवधि का निर्धारण विशेषज्ञ ही करें। बिना सलाह के अधिक मात्रा देना हानिकारक हो सकता है। नियमित चेकअप से बच्चे के विकास पर नजर रखना भी जरूरी है।