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नए महीने में आर्थिक नियमों में बदलाव: जानें क्या होगा आपके लिए खास

जैसे ही नया महीना शुरू होता है, कई महत्वपूर्ण आर्थिक नियम बदलते हैं, जो आपके वित्तीय लेन-देन, टैक्स, और खर्च पर प्रभाव डाल सकते हैं। इस लेख में जानें कि एडवांस टैक्स की नई डेडलाइन, पुरानी टैक्स व्यवस्था में राहत, यूपीआई भुगतान की सुरक्षा में सुधार, और शेयर बाजार में सख्त नियमों के बारे में क्या है। इसके अलावा, क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं के लिए बढ़ते खर्च और सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत में वृद्धि के बारे में भी जानकारी प्राप्त करें।
 

आर्थिक नियमों में बदलाव का महीना

जैसे ही नया महीना शुरू होता है, हमारी वित्तीय गतिविधियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम भी बदल जाते हैं। यह महीना आपके वित्तीय लेन-देन, आय, बचत और खर्च के तरीकों में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन लेकर आ रहा है। चाहे आप एक नौकरीपेशा हों, टैक्स चुकाते हों, शेयर बाजार में ट्रेडिंग करते हों या रोजमर्रा के भुगतानों के लिए यूपीआई का उपयोग करते हों, यह महीना आपके लिए विशेष महत्व रखता है। बैंकिंग शुल्क में वृद्धि से लेकर एडवांस टैक्स जमा करने की नई समयसीमा तक, कई नए नियम लागू हो रहे हैं। एक जागरूक उपभोक्ता के रूप में, यह जानना आवश्यक है कि ये बदलाव आपके बजट पर किस प्रकार प्रभाव डालेंगे।


एडवांस टैक्स की नई समयसीमा

यदि आप टैक्स भरते हैं, तो 15 जून की तारीख को अपने कैलेंडर में चिह्नित कर लें। जिन करदाताओं की अनुमानित टैक्स देनदारी 10,000 रुपये से अधिक है, उन्हें वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने एडवांस टैक्स की पहली किस्त इसी दिन तक जमा करनी होगी। इस समयसीमा तक कुल टैक्स का कम से कम 15% हिस्सा चुकाना अनिवार्य है। यह पहली बार है जब यह एडवांस किस्त नए आयकर अधिनियम 2025 और आयकर नियम 2026 के तहत जमा की जाएगी। समय पर भुगतान न करने पर हर महीने 1% का अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।


पुरानी टैक्स व्यवस्था में राहत

पुरानी टैक्स व्यवस्था (ओल्ड टैक्स रिजीम) का चयन करने वाले वेतनभोगियों के लिए कुछ सकारात्मक समाचार हैं। हॉस्टल भत्ते पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा अब 9,000 रुपये प्रति माह कर दी गई है। बच्चों की शिक्षा का भत्ता भी 100 रुपये से बढ़कर 3,000 रुपये प्रति बच्चा प्रति माह हो गया है। इसके अलावा, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद, और अहमदाबाद जैसे प्रमुख शहरों को अब 50% एचआरए (HRA) छूट वाली सूची में शामिल किया गया है, जिससे इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को टैक्स में बड़ा लाभ होगा।


यूपीआई भुगतान की सुरक्षा में सुधार

बैंकिंग क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई भुगतान को सुरक्षित बनाने के लिए एक नया फीचर पेश किया है। अब जब आप किसी का क्यूआर कोड स्कैन करेंगे या मोबाइल नंबर डालकर पैसे भेजेंगे, तो स्क्रीन पर उस व्यक्ति का सत्यापित नाम दिखाई देगा। इससे ऑनलाइन ठगी पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, ईपीएफओ (EPFO) भी यूपीआई के माध्यम से पीएफ (PF) का पैसा तुरंत निकालने की सुविधा का परीक्षण कर रहा है, जिससे कर्मचारियों को तेजी से उनका पैसा मिल सकेगा।


क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं के लिए बढ़ते खर्च

दूसरी ओर, क्रेडिट कार्ड का अधिक उपयोग करने वालों के लिए खर्च बढ़ने वाला है। कोटक महिंद्रा बैंक ने यूटिलिटी बिल, ईंधन, और किराया भुगतान पर मिलने वाले रिवॉर्ड प्वाइंट्स की सीमा निर्धारित कर दी है। अब किराए या शिक्षा के भुगतान पर 1% का शुल्क लगेगा। बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी 23 जून से अपने 'वन को-ब्रांडेड' क्रेडिट कार्ड पर बकाया राशि की ब्याज दर 3.49% से बढ़ाकर 3.75% प्रति माह कर दी है। आईसीआईसीआई बैंक 18 जून से अमेजन पे क्रेडिट कार्ड के जरिए किराया चुकाने पर मिलने वाला 1% का रिवॉर्ड बेनिफिट बंद कर रहा है। इसके अलावा, एचडीएफसी बैंक के ग्राहकों को 25 जून से 100 रुपये से ऊपर के यूपीआई भुगतान और 500 रुपये से अधिक की यूपीआई प्राप्ति पर ही एसएमएस अलर्ट मिलेंगे।


शेयर बाजार में सख्त नियम

शेयर बाजार के फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए सेबी (SEBI) का 50:50 मार्जिन नियम अब पूरी तरह लागू हो चुका है। इस नए नियम के तहत, निवेशकों को ट्रेडिंग मार्जिन का कम से कम 50% हिस्सा नकद या उसके समान साधनों में रखना होगा। अब केवल शेयरों को गिरवी रखकर पूरा मार्जिन नहीं लिया जा सकेगा, जिससे बाजार में जोखिम प्रबंधन में सुधार होगा।


सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत में वृद्धि

स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में कदम बढ़ाने वालों के लिए भी नया नियम आया है। सरकारी सब्सिडी या नेट मीटरिंग वाले सभी सोलर प्रोजेक्ट्स में अब केवल एएलएमएम (ALMM – Approved List of Models and Manufacturers) सूची में शामिल सोलर मॉड्यूल का ही उपयोग करना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का यह कदम घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम के कारण शुरुआती चरण में घरों में सोलर सिस्टम लगाने की लागत थोड़ी बढ़ सकती है।