☰
×

धनतेरस का पर्व: पूजा का शुभ मुहूर्त और खरीदारी का सही समय

धनतेरस का पर्व इस वर्ष 6 नवंबर को मनाया जाएगा, जो दीपावली के महापर्व की शुरुआत है। इस दिन लोग सोने, चांदी और नए बर्तनों की खरीदारी करते हैं। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:02 से 7:57 बजे तक है। जानें इस पर्व की विशेषताएं और खरीदारी का सही समय।
 

धनतेरस का महापर्व


इस वर्ष दीपावली का महापर्व 8 नवंबर को धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसकी शुरुआत धनतेरस के पावन पर्व से 6 नवंबर को होगी। यह पांच दिनों तक चलने वाले दीपोत्सव का पहला दिन है, जिसे सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग परंपरागत रूप से सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और नए बर्तन खरीदते हैं, साथ ही अपने घरों में सुख-शांति की कामना करते हैं। इस अवसर पर भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन शुभ वस्तुओं की घर में स्थापना से जीवन में खुशहाली आती है।


धनतेरस की पूजा का समय

पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी। इस दिन प्रदोष काल में की जाने वाली पूजा का विशेष महत्व है। लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना के लिए शुभ मुहूर्त शाम 6:02 से 7:57 बजे तक निर्धारित किया गया है, जबकि प्रदोष काल का समय शाम 5:33 से रात 8:09 बजे तक रहेगा।


सोने की खरीदारी का महत्व

धनतेरस के दिन सोना खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। खरीदारी का मुहूर्त 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से शुरू होकर 7 नवंबर की सुबह 6:37 बजे तक रहेगा। सोने को वैभव और आर्थिक मजबूती का प्रतीक माना जाता है, इसलिए लोग इस दिन स्वर्ण आभूषण या सोने के सिक्के खरीदना पसंद करते हैं। मान्यता है कि धनतेरस पर सोने की घर में वापसी से मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।


चांदी और नए बर्तनों की खरीदारी

सोने के साथ-साथ चांदी और नए बर्तनों की खरीदारी की परंपरा भी प्रचलित है। चांदी को शुद्धता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए लोग इस दिन चांदी के सिक्के और आभूषण खरीदते हैं। इसके अलावा, पीतल, तांबा या स्टील के नए बर्तन खरीदने का भी विधान है, जो घर में अन्न-धन के भंडार भरने का संकेत देते हैं।


मूर्ति खरीदने का महत्व

इस अवसर पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियों की खरीदारी का भी विशेष महत्व है। मां लक्ष्मी को धन और सुख-सुविधाओं की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश को बुद्धि और विवेक का प्रतीक माना जाता है। कई परिवार इन मूर्तियों को अपने घर के देवालय में स्थापित कर दीपावली की रात उनकी विशेष पूजा करते हैं।