धनतेरस 2026: कुबेर जी की पूजा और आरती की विधि
धनतेरस 2026 कुबेर जी की आरती
धनतेरस का महत्व: धनतेरस का पर्व हिंदू धर्म में धन, समृद्धि और सुख की कामना से जुड़ा है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान कुबेर धन और संपत्ति के देवता माने जाते हैं। इस दिन उनकी पूजा से घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
यदि आप धनतेरस पर भगवान कुबेर की पूजा करने का विचार कर रहे हैं, तो यहां उनकी आरती, मंत्र और पूजा की विधि दी गई है।
धनतेरस 2026 की तिथि:
इस वर्ष धनतेरस का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन शाम को भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है। जयपुर में धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:11 बजे से रात 8:07 बजे तक है। पूजा का समय स्थान और पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकता है।
क्यों होती है कुबेर जी की पूजा?
हिंदू धर्म में भगवान कुबेर को धन का देवता और यक्षों का राजा माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कुबेर देव धन-संपत्ति और ऐश्वर्य के अधिपति हैं। इसलिए धनतेरस के दिन उनकी पूजा से परिवार की सुख-समृद्धि और आर्थिक खुशहाली की प्रार्थना की जाती है।
कुबेर जी की आरती करना पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे भक्त भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और घर में सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं।
हालांकि, पूजा और आरती का फल धार्मिक आस्था से जुड़ा है और इसे धन प्राप्ति की निश्चित गारंटी के रूप में नहीं देखना चाहिए।
कुबेर जी की पूजा कैसे करें?
- घर और पूजा स्थल की सफाई करें।
- पूजा स्थल पर भगवान कुबेर की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
- भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए दीपक जलाएं।
- कुबेर देव को फूल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें।
- भगवान कुबेर के मंत्र का जाप करें।
- अंत में कुबेर जी की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
पूजा के दौरान अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार विधि अपनाना शुभ माना जाता है।
भगवान कुबेर का मंत्र
धनतेरस पर भगवान कुबेर की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप किया जा सकता है:
कुबेर मंत्र:
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये।
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
इस मंत्र के माध्यम से भगवान कुबेर से धन-धान्य और समृद्धि की कामना की जाती है।
सरल कुबेर मंत्र:
ॐ श्री कुबेराय नमः॥
इस सरल मंत्र का भी श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है।
भगवान कुबेर जी की आरती
धनतेरस की पूजा में भगवान कुबेर की आरती करने की परंपरा है। यहां कुबेर देव की प्रचलित आरती प्रस्तुत है:
ॐ जय यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भगतों के, भंडार कुबेर भरे॥
ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥
शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े, स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े॥
ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥
स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे, स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं, सब जय जयकार करें॥
ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥
गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करें॥
ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥
भांति-भांति के व्यंजन बहुत बने, स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने॥
ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥
बल बुद्धि विद्या दाता, हम तेरी शरण पड़े, स्वामी हम तेरी शरण पड़े।
अपने भक्त जनों के, सारे काम संवारे॥
ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥
मुकुट मणि की शोभा, मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले।
अगर कपूर की बाती, घी की ज्योत जले॥
ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥
यक्ष कुबेर जी की आरती, जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि का मंत्र
धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा भी विशेष रूप से की जाती है। उन्हें आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है।
धन्वंतरि मंत्र:
ॐ धन्वंतरये नमः॥
इस मंत्र का जाप भगवान धन्वंतरि के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए किया जाता है।
धनतेरस पर ध्यान रखने योग्य बातें
- पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और श्रद्धा से पूजा करें।
- भगवान कुबेर, माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का स्मरण करें।
- घर में दीपक जलाकर सकारात्मकता और खुशहाली की कामना करें।
- पूजा के दौरान परिवार की सुख-शांति और स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करें।
- धनतेरस पर जरूरतमंदों की सहायता और दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है।
धनतेरस का संदेश: यह पर्व केवल धन और खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य, सद्भाव और सकारात्मक जीवन की कामना का भी अवसर है। भगवान कुबेर की आरती और मंत्रों का जाप भक्तों के लिए श्रद्धा और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।