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दिल्ली हाई कोर्ट में नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई स्थगित

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुनवाई को स्थगित कर दिया है। यह मामला कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी से जुड़ा है, जिनके खिलाफ चार्जशीट पर ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। ईडी ने इस निर्णय को चुनौती दी है, यह कहते हुए कि न्यायिक समीक्षा आवश्यक है। मामले में गांधी परिवार के अलावा अन्य व्यक्तियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।
 

दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई स्थगित

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सुनवाई नहीं की। यह सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के समक्ष होनी थी, लेकिन अब इसे 25 मई के लिए स्थगित कर दिया गया है। ईडी ने ट्रायल कोर्ट के पिछले निर्णय को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। अधिकारियों के अनुसार, ईडी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट के आदेश की न्यायिक समीक्षा आवश्यक है और चार्जशीट में प्रस्तुत सामग्री पर औपचारिक संज्ञान लिया जाना चाहिए।


गांधी परिवार को नोटिस जारी

गांधी परिवार और अन्य को नोटिस

22 दिसंबर को, उच्च न्यायालय ने गांधी परिवार और अन्य को मुख्य याचिका और ईडी की उस अर्जी के संबंध में नोटिस जारी किया था, जिसमें ट्रायल कोर्ट के 16 दिसंबर, 2025 के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि एजेंसी की शिकायत पर संज्ञान लेना "कानूनन गलत" था, क्योंकि यह किसी FIR पर आधारित नहीं था। गांधी परिवार के अलावा, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, यंग इंडियन, डॉटैक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड और सुनील भंडारी को भी नोटिस जारी किए गए थे।


ईडी के आरोप

ईडी ने वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया

ईडी ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, और कांग्रेस के दिवंगत नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस, मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित एक साज़िश में शामिल थे। एजेंसी ने अपनी शिकायत में सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और यंग इंडियन का नाम भी शामिल किया है। ईडी के अनुसार, एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर गलत तरीकों से हासिल की गई थी। यह दावा किया गया है कि गांधी परिवार की यंग इंडियन में 76 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जिसने 90 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले धोखे से एजीएल की संपत्तियों पर कब्ज़ा कर लिया था।