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दिल्ली हाई कोर्ट ने वोटर लिस्ट रिविज़न में शिक्षकों की भूमिका पर उठाए सवाल

दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा स्कूल शिक्षकों को वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' में शामिल करने के निर्णय पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने पूछा कि किस अधिकार के तहत शिक्षकों को चुनावी कार्य में शामिल किया जा रहा है। इस मामले में सुनवाई के दौरान, बेंच ने शिक्षकों की छुट्टियों और उनके अधिकारों पर भी चिंता जताई। ECI ने बताया कि इस प्रक्रिया में केवल कुछ शिक्षकों की आवश्यकता होगी। जानें पूरी कहानी में क्या हुआ।
 

दिल्ली हाई कोर्ट का सवाल

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भारत के चुनाव आयोग (ECI) द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) के दौरान स्कूल शिक्षकों को 'बूथ लेवल ऑफिसर' (BLO) के रूप में नियुक्त करने के निर्णय पर सवाल उठाया। कोर्ट ने यह जानना चाहा कि किस अधिकार के तहत शिक्षकों को चुनावी कार्य में शामिल होने के लिए बाध्य किया जा रहा है। चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने वकील राजेश कुमार गोगना और अशोक अग्रवाल द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई की। इस याचिका में सरकारी, म्युनिसिपल और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को BLO और SIR के कार्यों के लिए तैनात करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान, बेंच ने यह भी पूछा कि क्या ECI संविधान के आर्टिकल 324 का उपयोग अपनी इच्छानुसार कार्यों को सही ठहराने के लिए कर सकता है।


कोर्ट की टिप्पणियाँ

चीफ़ जस्टिस ने कहा, "क्या आप आर्टिकल 324 का सहारा लेकर कुछ भी कर सकते हैं?" उन्होंने आयोग से उस कानूनी आधार के बारे में जानकारी मांगी जिसके तहत स्कूल शिक्षकों को SIR का कार्य करने का निर्देश दिया जा रहा था। कोर्ट ने यह भी बताया कि जो शिक्षक इस कार्य को करने से मना करते हैं, उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। बेंच ने यह भी कहा कि भले ही ECI इन कर्मचारियों को "वॉलंटियर" कहता है, लेकिन वास्तव में उनके पास आदेश मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। बेंच ने आयोग से कहा कि एक स्पष्ट बयान जारी करें कि यह कार्य स्वैच्छिक है, और तब हम याचिका का निपटारा कर देंगे।


ECI का पक्ष

ECI की ओर से उपस्थित वकील संजय वशिष्ठ ने बताया कि दिल्ली में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' का कार्य लगभग समाप्त हो चुका है और वोटर लिस्ट में सुधार के लिए केवल 10 से 14 प्रतिशत स्कूल शिक्षकों की आवश्यकता होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों को काम पर लगाने की शक्ति 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट' की धारा 13B(2) से मिलती है और परेशानी को कम करने के लिए इस शक्ति का उपयोग बहुत सीमित किया जाता है। वशिष्ठ ने आगे बताया कि चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, शिक्षकों को BLO की ड्यूटी केवल छुट्टियों और पढ़ाई के समय के अलावा अन्य समय में करनी होती है। हालांकि, बेंच ने यह सवाल उठाया कि चुनावी कार्य के लिए शिक्षकों को अपनी छुट्टियां क्यों छोड़नी पड़ें। किसी को आपके मानदेय या मुआवज़े में कोई दिलचस्पी नहीं है। क्या आपके निर्देशों को अनिवार्य माना जा सकता है? क्या आप बस यह कह सकते हैं कि 'नहीं, नहीं, हम मुआवज़ा दे रहे हैं, कृपया आएं'? क्या उनकी छुट्टियां बर्बाद कर दें? क्या उन्हें आराम की आवश्यकता नहीं है?