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दिल्ली सरकार को छात्रों के इलाज के लिए सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया है कि वह उन छात्रों को उचित चिकित्सा सुविधा प्रदान करे, जो हाल के विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल हुए थे। अदालत ने पुलिस के नियमों पर चर्चा करते हुए कहा कि असाधारण परिस्थितियों में पैलेट गन का उपयोग किया जा सकता है। जस्टिस बागची ने अधिकारियों से आग्रह किया कि उन्हें पुलिस बल को इस तरह प्रशिक्षित करना चाहिए कि उन्हें कठोर कदम उठाने की आवश्यकता न पड़े। इस मामले में अदालत ने प्रोटोकॉल स्थापित करने का सुझाव भी दिया।
 

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वह उन छात्रों को उचित चिकित्सा सुविधा प्रदान करे, जो हाल ही में विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के हमले में घायल हुए थे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहन की बेंच ने यह आदेश दिया। अदालत जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के उपयोग के आरोपों पर सुनवाई कर रही थी। बेंच ने कहा कि पुलिस नियमों के तहत असाधारण परिस्थितियों में पैलेट गन का उपयोग किया जा सकता है, और जब तक इन नियमों को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक इसका उपयोग अवैध नहीं माना जा सकता।


पैलेट गन के उपयोग पर चर्चा

जस्टिस बागची ने कहा कि यदि कानून पुलिस को उन गंभीर परिस्थितियों में गोलियां चलाने की अनुमति देता है, जहां अन्य उपाय जैसे लाठीचार्ज या आंसू गैस प्रभावी नहीं होते, तो अदालत को यह देखना होगा कि पैलेट गन के उपयोग पर रोक कैसे लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि जब कोई शांतिपूर्ण प्रदर्शन उपद्रवियों द्वारा बाधित हो जाता है, तो ऐसे मामलों में पैलेट गन का उपयोग एक विकल्प हो सकता है। चीफ जस्टिस ने सुझाव दिया कि अदालत को इस मामले में एक प्रोटोकॉल स्थापित करना चाहिए।


पुलिस की तैयारी पर जोर

जस्टिस बागची ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें पुलिस बल को इस तरह प्रशिक्षित करना चाहिए कि उन्हें कठोर कदम उठाने की आवश्यकता न पड़े। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पुलिसकर्मियों को सुरक्षा उपकरण प्रदान किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की वकील वृंदा ग्रोवर ने बताया कि प्रदर्शनकारियों पर इस्तेमाल किए गए धातु के पैलेट उनके शरीर से निकाले गए थे और उन्होंने तर्क किया कि ऐसे गोला-बारूद का उपयोग अत्यधिक था, क्योंकि भीड़ हिंसक नहीं थी।