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दिल्ली सरकार की नई आर्थिक गणना से व्यापार को मिलेगी नई दिशा

दिल्ली सरकार ने 8वीं आर्थिक गणना की तैयारियों की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य व्यापार और उद्यमशीलता को नई दिशा देना है। इस प्रक्रिया में विभिन्न व्यापारिक और कृषि इकाइयों की जानकारी एकत्र की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यह गणना सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण और क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण होगी। जानें इस पहल के बारे में और क्या-क्या योजनाएं बनाई जा रही हैं।
 

दिल्ली में आर्थिक गणना की तैयारी

दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में व्यावसायिक और उद्यमशील गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए नई पहल की है। इसके तहत, 8वीं आर्थिक गणना (8th Economic Census) के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं, जिसमें विभिन्न व्यापार, व्यवसाय और कृषि इकाइयों की एक विस्तृत सूची बनाई जाएगी। इस महत्वपूर्ण कार्य को लागू करने के लिए सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने दिल्ली सरकार के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय को केंद्रीय नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया है।


आर्थिक गणना का कार्यान्वयन

सोमवार को योजना विभाग द्वारा जारी आदेश में बताया गया कि दिल्ली के 13 जिले आर्थिक गणना और संबंधित सांख्यिकीय गतिविधियों के कार्यान्वयन के लिए निदेशालय के अधीन उप-एजेंसियों के रूप में कार्य करेंगे। अधिकारियों ने कहा कि राजस्व विभाग के अंतर्गत जिला कार्यालयों में तैनात सांख्यिकी अधिकारी एवं सहायक निदेशालय द्वारा सौंपे गए कार्यों का समन्वय और देखरेख की जाएगी।


जनगणना और आर्थिक गणना का महत्व

अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में जनगणना 2027 की प्रक्रिया चल रही है, जो 2027 की शुरुआत तक पूरी हो जाएगी। इसके बाद आर्थिक गणना का कार्य शुरू होगा। आर्थिक गणना का मुख्य उद्देश्य उद्यमशील गतिविधियों की विशेषताओं से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र करना है, जैसे कि स्थान, संचालन की प्रकृति और वित्त के स्रोत।


इन आंकड़ों का उपयोग सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण करने और लक्षित क्षेत्रीय विकास के लिए कार्यक्रमों एवं योजनाओं की तैयारी में किया जाएगा। इसके अलावा, एमसीडी और एनडीएमसी के स्कूल शिक्षक तथा अन्य सरकारी कर्मचारी इस गणना में सहयोग करेंगे।