दिल्ली में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, छह आरोपी गिरफ्तार
साइबर जालसाज़ गिरोह का पर्दाफाश
नई दिल्ली, चार अगस्त: दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन प्रचार और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के माध्यम से लाभ का झांसा देकर एक व्यक्ति से ठगी करने वाले एक साइबर जालसाज़ गिरोह के छह सदस्यों को राजस्थान और मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को इस मामले की जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने एक दिल्ली निवासी से फर्जी ऑनलाइन प्रचार कार्य के लिए उच्च कमीशन का लालच देकर और एक नकली क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश पर बड़े मुनाफे का वादा करके 4.29 लाख रुपये की धोखाधड़ी की।
जालसाज़ों ने पहले पीड़ित को डिजिटल मार्केटिंग कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में एक समूह में शामिल किया, फिर उसका विश्वास जीतने के लिए उसे कुछ कमीशन का भुगतान किया। इसके बाद, उसे दूसरे समूह में जोड़ा गया, जहां उसे फर्जी प्रचार कार्यों और क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग में बड़ी राशि निवेश करने के लिए मनाया गया। दक्षिण पश्चिम दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अमित गोयल ने बताया कि जालसाज़ों ने फर्जी मुनाफा दिखाकर शिकायतकर्ता से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कराए। जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा कि उसका ट्रेडिंग खाता 'फ्रीज' कर दिया गया है और उसे खाता सक्रिय करने के लिए और पैसे की आवश्यकता है।
जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तो उसने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद दक्षिण पश्चिम जिले में ई-प्राथमिकी दर्ज की गई।
डीसीपी ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, एटीएम की सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूतों का विश्लेषण किया। जांच के दौरान टीम पहले जयपुर पहुंची, जहां 'म्यूल' बैंक खाता धारक सुरेश कुमार यादव और खाते की व्यवस्था करने वाले पूरनमल यादव को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने बताया कि ठगी से प्राप्त पैसे को मध्य प्रदेश के इंदौर में एटीएम से निकाला गया था, और इस मामले में अरशान मोहम्मद और गुफरान कुरैशी को भी गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने अभिजीत पाटीदार और आर्यन राठौड़ को भी गिरफ्तार किया, जिन्होंने ठगी के पैसे को प्राप्त करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। पुलिस ने इस मामले में छह मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनमें अपराध से संबंधित बातचीत मौजूद है।