दिल्ली में पुलिस पर हमलों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
दिल्ली में "चलो संसद" मार्च के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए हिंसक हमलों का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय में पहुंच गया है। चार घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने अदालत में हस्तक्षेप याचिका दायर की है, जिसमें उन लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है, जिन्होंने पुलिस पर हमले किए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
याचिका में शामिल परिवार
यह याचिका एसीपी कैलाश सिंह बिष्ट के बेटे, सब-इंस्पेक्टर संदीप कुमार की बेटी, कांस्टेबल धीरज की पत्नी और एएसआई हमेंदर राठी के बेटे द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अदालत में केवल प्रदर्शनकारियों का पक्ष नहीं, बल्कि उन पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की पीड़ा भी रखी जानी चाहिए, जिन्होंने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली।
हमले का विवरण
याचिका में कहा गया है कि 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर और नई दिल्ली के अन्य क्षेत्रों में लगभग 20 से 30 हजार लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए करीब तीन हजार पुलिसकर्मी तैनात थे। इस दौरान पुलिस पर कांच की बोतलों, पत्थरों और फुटपाथ से उखाड़ी गई टाइलों से हमला किया गया। आरोप है कि कई टाइलों को धारदार बनाने के लिए जमीन पर घिसा गया ताकि पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें पहुंचाई जा सकें। इसे कानून-व्यवस्था संभाल रहे सुरक्षा बलों पर सुनियोजित हमला बताया गया है।
घायल पुलिसकर्मियों की स्थिति
याचिका में सब-इंस्पेक्टर संदीप कुमार के बारे में बताया गया है कि उन्हें भीड़ से अलग कर डंडों और पत्थरों से बेरहमी से पीटा गया। उनके शरीर पर जूतों के निशान मिले और सिर पर गंभीर चोटें आईं, जिनके लिए उन्हें तत्काल टांके लगाने पड़े। एसीपी कैलाश सिंह बिष्ट को भी गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। एएसआई हमेंदर राठी की चेहरे की दो हड्डियां टूट गईं और कांस्टेबल धीरज को सिर में गंभीर चोटें आईं।
सुप्रीम कोर्ट से मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी मांग की गई है कि पुलिस पर हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी सुरक्षा और जीवन के अधिकार के हकदार हैं। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि किसी को भी हिंसा करने या वर्दीधारी पुलिसकर्मियों पर हमला करने का अधिकार नहीं है।
दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारियों का समर्थन
दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी घायल जवानों के समर्थन में आवाज उठाई है। दिल्ली पुलिस महासंघ ने 31 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरने की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि धरने का उद्देश्य घायल पुलिसकर्मियों के साथ एकजुटता दिखाना और हिंसा में शामिल तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करना है।
शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन हिंसा और पथराव किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है। यदि कानून का पालन करने वाले पुलिसकर्मी असुरक्षित महसूस करेंगे, तो कानून-व्यवस्था प्रभावित होगी। इसलिए, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ-साथ पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देना आवश्यक है।