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दिल्ली में गोबर के उपयोग के लिए CBG प्लांट्स की स्थापना का समझौता

दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में गोबर के उचित उपयोग के लिए CBG प्लांट्स की स्थापना का समझौता हुआ। इस पहल का उद्देश्य न केवल पशुपालकों की आय बढ़ाना है, बल्कि यमुना नदी की स्वच्छता को भी सुनिश्चित करना है। जानें इस समझौते के पीछे की सोच और इसके संभावित लाभों के बारे में।
 

दिल्ली में CBG प्लांट्स की स्थापना का ऐतिहासिक समझौता

नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में, दिल्ली नगर निगम (MCD) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने गोबर के उचित उपयोग के लिए कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट्स की स्थापना हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, दिल्ली के उप-राज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय गृह सचिव और केंद्रीय सहकारिता सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।




अपने संबोधन में, अमित शाह ने कहा कि यह समझौता देश के प्रमुख शहरों को स्वच्छ बनाने के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि इस पहल से न केवल पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि स्वच्छता में भी सुधार होगा, साथ ही कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) का उत्पादन होगा और ऑर्गेनिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।




अमित शाह ने यह भी कहा कि सभी नागरिक चाहते हैं कि यमुना नदी का जल साफ हो, लेकिन इसके लिए गंदगी के निकास की व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यमुना के शुद्धिकरण के संकल्प को पूरा करने की दिशा में इस समझौते को एक महत्वपूर्ण कदम बताया।




केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि दिल्ली में गटर के पानी और औद्योगिक कचरे के शुद्धिकरण के लिए लगभग 80 ट्रीटमेंट प्लांट्स पर कार्य प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि भविष्य में यमुना में गोबर का एक भी अंश नहीं जाने दिया जाएगा। इसके लिए सवा लाख मवेशियों के अपशिष्ट का उचित निस्तारण आवश्यक है। शाह ने आश्वासन दिया कि दिसंबर 2028 तक यमुना में एक भी लीटर गंदा पानी नहीं जाने दिया जाएगा।




अमित शाह ने नांगली, घोघा-गोयला और गाजीपुर अपशिष्ट निस्तारण प्लांट्स से गोबर की प्रोसेसिंग का कार्य पूरा करने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह पहल शहरी क्षेत्रों की स्वच्छता और देशभर के करोड़ों पशुपालकों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगी। इस समझौते में प्रति किलो ₹1 पशुपालकों को देने का प्रावधान भी किया गया है।