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दिल्ली में कमर्शियल वाहनों के लिए एंट्री शुल्क में वृद्धि से ट्रांसपोर्टर्स में नाराजगी

दिल्ली में कमर्शियल वाहनों के लिए एंट्री शुल्क में वृद्धि ने ट्रांसपोर्टर्स के बीच नाराजगी पैदा कर दी है। नगर निगम द्वारा पर्यावरण शुल्क में बढ़ोतरी के चलते हल्के और भारी वाहनों के लिए शुल्क में काफी इजाफा हुआ है। परिवहन संगठनों का कहना है कि यह निर्णय व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित करेगा और आम जनता पर भी असर डालेगा। संगठनों ने सरकार से बीएस-6 वाहनों को अतिरिक्त शुल्क से छूट देने की मांग की है। यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो बड़े स्तर पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
 

दिल्ली में कमर्शियल वाहनों के लिए बढ़ा शुल्क

दिल्ली में कमर्शियल वाहनों की एंट्री अब और महंगी हो गई है। नगर निगम द्वारा पर्यावरण शुल्क (ECC) में वृद्धि के निर्णय ने ट्रांसपोर्ट क्षेत्र और व्यापारियों के बीच चिंता का माहौल बना दिया है। इस निर्णय के खिलाफ देशभर में परिवहन संगठनों में असंतोष बढ़ता जा रहा है और विरोध की लहर तेज हो रही है।


पर्यावरण शुल्क में वृद्धि का आदेश

दिल्ली नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए टोल नाकों पर पर्यावरण शुल्क बढ़ाने का आदेश जारी किया है। हल्के कमर्शियल वाहनों (LCV) का शुल्क 1400 रुपये से बढ़ाकर लगभग 2000 रुपये कर दिया गया है, जबकि भारी ट्रकों के लिए यह शुल्क 2600 रुपये से बढ़कर 4000 रुपये तक पहुंच गया है। इस निर्णय से कुल मिलाकर 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।


परिवहन संगठनों की प्रतिक्रिया

परिवहन संगठनों ने इस वृद्धि पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय और व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित करती है। संगठनों का आरोप है कि सरकार का यह कदम वास्तविकता से दूर है और इससे सप्लाई चेन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।


बीएस-6 वाहनों पर अतिरिक्त शुल्क का विरोध

ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि बीएस-6 मानकों वाले डीजल वाहन पहले से ही कम प्रदूषण फैलाते हैं। ऐसे में उन पर अतिरिक्त ग्रीन टैक्स या एंट्री शुल्क लगाना तर्कहीन है। उन्होंने इसे डबल टैक्सेशन करार दिया है, यह कहते हुए कि एक ही वाहन पर बार-बार टैक्स लगाना गलत है।


आम जनता पर असर

विरोध कर रहे संगठनों का मानना है कि जो वाहन दिल्ली में माल लाते हैं या यहां से सामान ले जाते हैं, वे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं। ऐसे वाहनों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से व्यापार का ढांचा कमजोर होगा। ट्रांजिट वाहनों पर सीमित शुल्क को वे कुछ हद तक उचित मानते हैं।


सरकार से मांगें

परिवहन संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं, जिसमें बीएस-6 वाहनों को अतिरिक्त शुल्क से छूट देने, दिल्ली में माल लाने वाले वाहनों को विशेष रियायत देने और नीति बनाने से पहले संबंधित संगठनों से चर्चा करने की बात शामिल है।


आंदोलन की चेतावनी

संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो जल्द ही देशभर के ट्रांसपोर्टर्स की आपात बैठक बुलाई जाएगी। इसमें बड़े स्तर पर आंदोलन और सख्त कदम उठाने पर विचार किया जाएगा। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि परिवहन क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसे कमजोर करने वाले किसी भी निर्णय का विरोध किया जाएगा।


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दिल्ली में कमर्शियल वाहनों की एंट्री हुई महंगी, ECC बढ़ने पर भड़के ट्रांसपोर्टर्स