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दिल्ली में अंकित शर्मा हत्या मामले में ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया गया

दिल्ली की अदालत ने गुप्तचर ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया है। इस फैसले ने न केवल ताहिर हुसैन की भूमिका को उजागर किया है, बल्कि आम आदमी पार्टी के नेताओं की राजनीतिक रक्षा पर भी सवाल उठाए हैं। जानें इस मामले की पूरी कहानी, अदालत के निर्णय और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ।
 

दिल्ली की अदालत का महत्वपूर्ण फैसला

छह साल से अधिक समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद, दिल्ली की अदालत ने गुप्तचर ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया है। अदालत ने ताहिर के साथ नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी दोषी माना, जबकि अन्य छह आरोपियों को साक्ष्य की कमी के कारण बरी कर दिया गया। ताहिर हुसैन को हत्या, विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने, दंगा करने और आपराधिक बल प्रयोग जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया गया। हालांकि, उसके खिलाफ आपराधिक साजिश का आरोप सिद्ध नहीं हो सका। अदालत के फैसले के बाद ताहिर हुसैन अदालत कक्ष में रो पड़ा, लेकिन यह आंसू उस परिवार के दर्द को कम नहीं कर सकते जिसने अपने बेटे को बर्बरता से खो दिया।


अंकित शर्मा की हत्या का मामला

यह मामला 25 फरवरी 2020 की उस भयावह घटना से जुड़ा है, जब गुप्तचर ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा ड्यूटी से घर लौटने के बाद फिर से बाहर गए और फिर कभी वापस नहीं आए। उनके परिवार ने उनकी तलाश की, लेकिन बाद में स्थानीय लोगों ने बताया कि उनकी हत्या कर दी गई है और शव को चांद बाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया। बाद में नाले से उनका शव बरामद हुआ। अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार ने दयालपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि ताहिर हुसैन और उसके साथियों ने पहले अपने दफ्तर में जुटान किया और फिर अंकित शर्मा की हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया।


अदालत का निर्णय और इसके प्रभाव

इस मामले में कुल ग्यारह लोगों के खिलाफ मुकदमा चला। मार्च 2023 में अदालत ने सभी आरोपियों पर दंगा, घातक हथियारों के साथ दंगा, विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने, हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। ताहिर हुसैन पर सार्वजनिक अशांति फैलाने और अपराध के लिए उकसाने से जुड़े अतिरिक्त आरोप भी लगाए गए थे। अब अदालत ने पांच लोगों को दोषी ठहराया है, जबकि छह आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण बरी कर दिया।


विशेष पुलिस आयुक्त की प्रतिक्रिया

इस फैसले के बाद, दिल्ली दंगों की जांच की निगरानी करने वाले तत्कालीन विशेष पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा ने कहा कि अदालत का निर्णय पुलिस जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को प्रमाणित करता है। उन्होंने कहा कि दंगों के दौरान पुलिस का प्राथमिक दायित्व कानून व्यवस्था बनाए रखना था और साथ ही निष्पक्ष तथा साक्ष्य आधारित जांच करना भी था। उन्होंने यह भी कहा कि जांच दल ने जो मेहनत की थी, वह न्यायिक जांच की कसौटी पर खरी उतरी और दंगों के सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

इस मामले में अंकित शर्मा की हत्या उत्तर पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा के बीच हुई थी। इस हिंसा में 53 लोगों की जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे। अंकित शर्मा हत्याकांड पूरे दंगा प्रकरण का सबसे चर्चित और संवेदनशील मामला बन गया था। अब अदालत का यह फैसला उन महत्वपूर्ण न्यायिक निष्कर्षों में शामिल हो गया है, जिनका संबंध दिल्ली दंगों से है। सजा की अवधि पर फैसला अभी अलग से सुनाया जाना बाकी है।


भाजपा का हमला और आम आदमी पार्टी की स्थिति

फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि ताहिर हुसैन उस समय आम आदमी पार्टी का निर्वाचित पार्षद था और अरविंद केजरीवाल का करीबी माना जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि ताहिर हुसैन को राजनीतिक संरक्षण दिया गया और दिल्ली दंगों के दौरान उसे बचाने की कोशिश की गई। भाटिया ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए अरविंद केजरीवाल ने न तो अंकित शर्मा के लिए संवेदना व्यक्त की और न ही दंगों में मारे गए अन्य नागरिकों के लिए कोई स्पष्ट आवाज उठाई।


आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया

गौरव भाटिया ने आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें अदालत द्वारा दी गई सजा को दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया था। उनका कहना था कि जब अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर फैसला दिया है, तब दोषी के पक्ष में खड़ा होना केवल वोट बैंक की राजनीति का परिचायक है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी आज भी ताहिर हुसैन से पूरी तरह दूरी बनाने का साहस नहीं दिखा रही है।


कपिल मिश्रा की टिप्पणी

दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने भी अदालत के फैसले के बाद कहा कि वर्ष 2020 के दिल्ली दंगे पहले से रची गई साजिश का हिस्सा थे और अदालत के निर्णय ने इस दिशा में महत्वपूर्ण संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए भी जवाब है जो वर्षों से पूरे मामले को अलग दिशा देने का प्रयास कर रहे थे।


निष्कर्ष

अदालत का फैसला अपने आप में एक कानूनी निष्कर्ष है, लेकिन राजनीति के लिए यह एक असहज आईना भी है। जिस ताहिर हुसैन को कभी आम आदमी पार्टी का सक्रिय और प्रभावशाली चेहरा माना जाता था, उसी के दोष सिद्ध होने के बाद अब उससे दूरी बनाने की कोशिशें हो रही हैं। सवाल यह है कि जब आरोप सामने आ रहे थे तब उसका बचाव क्यों किया गया? और आज भी यदि कोई नेता अदालत के फैसले पर दुख जता रहा है तो वह आखिर किसके साथ खड़ा दिखाई देता है। अंकित शर्मा की हत्या का यह मामला केवल एक अपराध का नहीं, बल्कि उस राजनीतिक सोच का भी दस्तावेज बन गया है जिसमें कई नेताओं ने न्याय से पहले राजनीति को प्राथमिकता दी।