दिल्ली पुलिस ने साइबर फ्रॉड के दो मास्टरमाइंड्स को गिरफ्तार किया
साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के इंटर स्टेट सेल (आईएससी) ने एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश करते हुए दो मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और फर्जी निवेश योजनाओं के माध्यम से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित मामलों में की गई है। इस ऑपरेशन का नेतृत्व इंस्पेक्टर कमल कुमार और सतेंद्र खारी ने एसीपी आईएससी रमेश लांबा की निगरानी में किया।
पहला मामला एक व्यक्ति से संबंधित है, जो बैंक एन्क्लेव, नई दिल्ली का निवासी है। उसे एक फर्जी ऑनलाइन निवेश योजना के तहत 31.45 लाख रुपये की ठगी का सामना करना पड़ा। आरोपियों ने उसे एक झूठे व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल कर एक ऐप डाउनलोड कराया और अधिक लाभ का लालच देकर छह विभिन्न बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए। इसके बाद, व्हाट्सएप ग्रुप को डी-एक्टिवेट कर दिया गया और ऐप भी बंद कर दिया गया, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
जांच में पता चला कि पैसे को कई म्यूल खातों के माध्यम से लेयरिंग कर इधर-उधर भेजा गया। इसके बाद पंजाब और गुजरात में छापेमारी के दौरान म्यूल अकाउंट धारक अर्जुन सिंह (39) को गिरफ्तार किया गया, जिसने कमीशन के बदले पैसे निकाले थे। उसके पास से मोबाइल, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और चेक बुक बरामद की गई।
दूसरा मामला एक एनआरआई महिला से संबंधित है, जो अमेरिका से आई थी। उसे दिल्ली आने पर एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से कॉल करके खुद को सैन फ्रांसिस्को दूतावास और दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर धमकाया गया। आरोपियों ने नकली वीडियो कॉल के माध्यम से उसे डराया और 30 लाख रुपये एक म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर करवा लिए।
क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी सामने आया कि यह राशि पंजाब स्थित एक साझेदारी फर्म के खाते में गई, जहां से कुछ ही मिनटों में इसे विभिन्न खातों में भेज दिया गया। क्राइम ब्रांच की टीम ने मोहाली और चंडीगढ़ में छापेमारी कर आरोपी वरुण को गिरफ्तार किया। उसके पास से 38 एटीएम कार्ड, 51 चेक बुक, मोबाइल फोन, लैपटॉप, नकदी और एक कार बरामद की गई।
क्राइम ब्रांच ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है और पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है।