दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में जांच के लिए समय मांगा
जंतर-मंतर प्रदर्शन से संबंधित मामले की स्थिति
दिल्ली पुलिस ने राउज़ एवेन्यू अदालत से आगे की जांच के लिए समय की मांग की है। यह मामला 2025 में जंतर-मंतर पर यूजीसी विनियम मसौदे के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। इस मामले में 2025 में संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, अखिलेश यादव, ए राजा और कनिमोझी जैसे कई नेताओं के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया गया है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अश्वनी पंवार ने इस मामले की सुनवाई की, जिसमें दिल्ली पुलिस ने स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की और आगे की जांच के लिए समय मांगा। अदालत ने पहले दिल्ली पुलिस से यह सवाल किया था कि प्रस्तावित आरोपियों को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस क्यों नहीं भेजे गए और बिना नोटिस के 10 आरोपियों के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट कैसे दर्ज की गई।
आरोपियों की स्थिति और जांच की प्रगति
19 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में सहायक न्यायाधीश पारस दलाल ने बताया कि आरोपपत्र में 11 व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि एक आरोपी, सीवीएमपी एझिलारासन को 7 अप्रैल, 2025 को ईमेल के माध्यम से बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी किया गया था। अदालत ने यह बात नोट की कि आरोपी जांच में शामिल नहीं हुआ।
जांच अधिकारी (आईओ) ने इस मामले में सीवीएमपी एझिलारासन को शामिल करने के लिए कोई अन्य कदम नहीं उठाया। अन्य 10 आरोपियों के लिए भी जांच अधिकारी द्वारा कोई नोटिस जारी नहीं किया गया।
अदालत के आदेश और पुलिस की कार्रवाई
अदालत ने यह पाया कि जांच अधिकारी ने सत्येंद्र कुमार अंतिल मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया और दिल्ली पुलिस के 2020 के स्थायी आदेश का उल्लंघन किया।