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दिल्ली पुलिस ने 40 साल बाद बुजुर्ग हत्यारे को पकड़ा

दिल्ली पुलिस ने 40 साल पहले अपनी पत्नी की हत्या करने वाले 84 वर्षीय चंद्रशेखर प्रसाद को गिरफ्तार किया है। यह मामला 1986 का है, जब आरोपी ने अपनी पत्नी की हत्या के बाद पुलिस को धोखा दिया। डिजिटल निगरानी और मानव खुफिया के माध्यम से उसकी पहचान की गई। जानें कैसे पुलिस ने उसे पकड़ा और इस मामले में न्याय की प्रक्रिया क्या है।
 

दिल्ली में 40 साल पुराना हत्या का मामला


दिल्ली क्राइम समाचार: यह कहावत सही साबित हुई है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे बुजुर्ग को गिरफ्तार किया है, जिसने 40 साल पहले अपनी पत्नी की हत्या की थी। 84 वर्षीय चंद्रशेखर प्रसाद 1986 से पुलिस को धोखा दे रहा था, लेकिन डिजिटल निगरानी और मानव खुफिया के माध्यम से उसे अंततः गिरफ्तार कर लिया गया।


यह मामला 19 अक्टूबर 1986 का है। चंद्रशेखर प्रसाद, जो बिहार के नालंदा का निवासी है, दिल्ली के शकरपुर में अपनी पत्नी के साथ रहता था और एक अखबार में कंपोजर के रूप में काम करता था। पुलिस के अनुसार, उसे अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह था, जिसके चलते उसने एक भयानक साजिश रची।


घटना के दिन, प्रसाद ने अपने साथियों के साथ मिलकर घर के नौकर को बंदूक की नोक पर बंधक बनाया और फिर अपनी पत्नी की निर्मम हत्या कर दी। इसके बाद वह दिल्ली से भाग गया।


चार दशकों तक बिना डिजिटल फुटप्रिंट के फरारी


जांच अधिकारियों के लिए यह मामला किसी पहेली से कम नहीं था। 1986 में न तो मोबाइल फोन थे, न आधार जैसी कोई पहचान प्रणाली और न ही सीसीटीवी कैमरे। पुलिस के पास केवल आरोपी की धुंधली तस्वीरें थीं। इन 40 वर्षों में, आरोपी ने अपनी पहचान बदलकर पंजाब, हरियाणा, बिहार और दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में समय बिताया।


84 वर्षीय हत्यारे का जाल में फंसना


डीसीपी (क्राइम) संजीव कुमार यादव ने बताया कि तकनीकी चुनौतियों के बावजूद पुलिस ने हार नहीं मानी। पुलिस ने आरोपी के बच्चों और उसके पैतृक गांव नालंदा के संपर्कों की जांच शुरू की। संदिग्ध नंबरों को सर्विलांस पर रखा गया।


फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान पता चला कि आरोपी जीवित है और कभी-कभी अपने परिवार या गांव के कार्यक्रमों में गुप्त रूप से शामिल होता है। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने उत्तर-पश्चिम दिल्ली के अलीपुर इलाके में छापेमारी की, जहां वह छिपा हुआ था। 84 साल की उम्र में उसे पुलिस देखकर आश्चर्य हुआ।


न्याय की जीत


यह गिरफ्तारी उन अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सोचते हैं कि समय के साथ उनके अपराध भुला दिए जाएंगे। 40 साल बाद, मृतका को न्याय मिला है। पुलिस अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर रही है ताकि इस बुजुर्ग अपराधी को उसके किए की सजा मिल सके।