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दिल्ली पुलिस का 'ऑपरेशन गैंग बस्ट': 500 से अधिक अपराधियों की गिरफ्तारी

दिल्ली पुलिस ने 'ऑपरेशन गैंग बस्ट' नामक एक बड़े अभियान के तहत 48 घंटे में 500 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह अभियान गिरोहों और संगठित अपराधियों के खिलाफ चलाया गया, जिसका उद्देश्य हिंसक अपराधों पर नियंत्रण पाना और गिरोहों के बीच प्रतिद्वंद्विता को रोकना है। पुलिस ने गिरोह के सदस्यों के ठिकानों पर छापे मारे और कई आदतन अपराधियों को पकड़ा। इस अभियान के दौरान, हिमांशु भाऊ गिरोह के तीन सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया, जो हत्या के प्रयास में शामिल थे।
 

दिल्ली में गिरोहों के खिलाफ बड़ा अभियान

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को एक बयान में बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में गिरोहों और संगठित अपराधियों के खिलाफ 48 घंटे का एक व्यापक अभियान 'ऑपरेशन गैंग बस्ट' शुरू किया गया है। इस अभियान के दौरान, 500 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है, जो विभिन्न गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े हुए थे। अधिकारियों ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य सक्रिय गिरोह मॉड्यूल को समाप्त करना, हिंसक अपराधों पर नियंत्रण पाना और गिरोहों के बीच प्रतिद्वंद्विता को रोकना है।


पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

इस अभियान के तहत, पुलिस ने गिरोह के सदस्यों और उनके सहयोगियों के प्रमुख ठिकानों पर छापे मारे और लक्षित अभियान चलाए। पुलिस ने हत्या, हत्या के प्रयास, जबरन वसूली, डकैती और हथियार संबंधी अपराधों में वांछित कई आदतन अपराधियों को गिरफ्तार किया। वरिष्ठ अधिकारियों ने अभियान की निगरानी की और जिला एवं विशेष इकाइयों को समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर में सक्रिय गैंगस्टरों को कड़ा संदेश देना था।


हिमांशु भाऊ गिरोह के हमलावरों की गिरफ्तारी

शनिवार को, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बावना क्षेत्र में हत्या के प्रयास के मामले में हिमांशु भाऊ गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से अत्याधुनिक पिस्तौल और तीन जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। इसके साथ ही, एक चोरी की मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है।


गिरफ्तार आरोपियों का कनेक्शन

पूठ खुर्द निवासी विक्की हद्दल विदेश से हिमांशु भाऊ गिरोह का संचालन कर रहा था। पुलिस के अनुसार, व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते हद्दल ने गिरफ्तार आरोपियों को यामीन चंदू पर गोली चलाने का निर्देश दिया था। यह बदला उनके चाचा धरमबीर की हत्या के लिए लिया गया था। 8 दिसंबर को, जब यामीन चंदू सुल्तानपुर डबास की ओर जा रहे थे, तब आरोपियों ने जानबूझकर उनकी स्कूटी को टक्कर मारी और उन पर गोलियां चलाईं। हालांकि, यामीन बाल-बाल बच गए।