×

दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी में विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन

दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जिम्मेदारी और सतत विकास पर जोर दिया गया। इस कार्यक्रम में वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और ऑनलाइन व्याख्यान शामिल थे। प्रसिद्ध पर्यावरण चिंतक डॉ. राजेंद्र सिंह ने जलवायु परिवर्तन और जल संकट पर चर्चा की। उन्होंने युवाओं को पर्यावरण के संरक्षक बनने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन सभी नागरिकों से प्रकृति संरक्षण और जल बचाने का संकल्प लेने के साथ हुआ।
 

पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी (DTU) ने हरिजन सेवक संघ परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जिम्मेदारी और सतत विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए प्रकृति की रक्षा के लिए अपने प्रयासों को मजबूत करने का संकल्प लिया।


वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान

कार्यक्रम की शुरुआत हरिजन सेवक संघ परिसर में वृक्षारोपण अभियान से हुई, जिसमें विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए गए और उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया। इसके अलावा, स्वच्छता अभियान, पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता और पर्यावरण जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।


संकल्प दिवस के रूप में पर्यावरण दिवस

वरिष्ठ समाजसेवी श्री लक्ष्मी जी ने इस अवसर पर पर्यावरण दिवस को केवल एक औपचारिकता न मानने का आह्वान किया। उन्होंने इसे 'संकल्प दिवस' के रूप में मनाने का सुझाव दिया और कहा कि जब तक व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र और प्रकृति के बीच संतुलन नहीं बनेगा, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं है। उन्होंने श्रमदान, आत्मानुशासन और सामाजिक संवेदनशीलता को पर्यावरण संरक्षण का आधार बताया।


एक सद्भावनापूर्ण कार्य का आह्वान

हरिजन सेवक संघ के श्री संजय कुमार राय ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए प्रतिदिन 'एक सद्भावनापूर्ण कार्य' करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, श्रम के प्रति सम्मान और आत्मनिर्भरता ही एक बेहतर समाज और स्वच्छ पर्यावरण की नींव हैं।


डॉ. राजेंद्र सिंह का ऑनलाइन व्याख्यान

कार्यक्रम के दूसरे चरण में, भारत के प्रसिद्ध पर्यावरण चिंतक और 'जल पुरुष' डॉ. राजेंद्र सिंह ने ऑनलाइन व्याख्यान दिया। उन्होंने 'भविष्य की पीढ़ियों के लिए सततता' विषय पर चर्चा करते हुए जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की।


जल संकट और समाधान

डॉ. सिंह ने कहा कि आज पूरी दुनिया 'क्लाइमेट इमर्जेंसी' के दौर से गुजर रही है। उन्होंने जल संकट पर चर्चा करते हुए बताया कि भारत के कई क्षेत्रों में भूजल स्तर गिर रहा है और नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं। उन्होंने वर्षा जल संचयन और जल के विवेकपूर्ण उपयोग को संकट के समाधान के रूप में प्रस्तुत किया।


युवाओं का आह्वान

डॉ. सिंह ने युवाओं से अपील की कि वे केवल पर्यावरण के दर्शक न बनें, बल्कि उसके संरक्षक और नेतृत्वकर्ता बनें। उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक जल, वृक्ष और भूमि संरक्षण के लिए छोटे-छोटे प्रयास भी नियमित रूप से करे, तो बड़ा परिवर्तन संभव है।


कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम के अंत में, डॉ. सरोज मलिक ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि शिक्षा संस्थानों और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से विद्यार्थियों में सेवा, श्रम और पर्यावरणीय चेतना के संस्कार विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने सप्ताह में कम से कम एक दिन श्रमदान आधारित गतिविधियों का आयोजन करने का सुझाव भी दिया।


पर्यावरण संरक्षण का संदेश

दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी के कुलपति ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है। विश्वविद्यालय शिक्षण, अनुसंधान और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पर्यावरणीय चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्यों को बढ़ावा देता रहेगा।