दिल्ली और हिमाचल पुलिस के बीच विवाद: युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शिमला में तीन युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया, जिसके बाद हिमाचल पुलिस ने इसे गैरकानूनी बताया। इस घटना ने दो राज्यों की पुलिस के बीच विवाद को जन्म दिया है। जानें इस हाईवोल्टेज ड्रामे का पूरा घटनाक्रम और इसके राजनीतिक पहलुओं के बारे में।
Feb 26, 2026, 13:29 IST
घटनाक्रम का संक्षिप्त विवरण
घटनाक्रम का संक्षिप्त विवरण
- गिरफ्तारी की शुरुआत: बुधवार की सुबह, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की एक टीम, जिसमें लगभग 15-20 जवान शामिल थे, शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के चिड़गांव क्षेत्र में एक रिसॉर्ट में पहुंची। यहां पर तीन युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों—सौरभ सिंह (उत्तर प्रदेश), अरबाज खान (उत्तर प्रदेश) और सिद्धार्थ अवधूत (मध्य प्रदेश)—को AI समिट में प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने होटल के CCTV DVR और रजिस्टर भी अपने कब्जे में ले लिए।
- हिमाचल पुलिस का हस्तक्षेप: हिमाचल पुलिस ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पुलिस को सूचित किए बिना और उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्रवाई की, जिसे उन्होंने गैरकानूनी और अपहरण के समान बताया। होटल मालिक की शिकायत पर चिड़गांव थाने में FIR दर्ज की गई, जिसमें दिल्ली पुलिस के जवानों पर अपहरण, घर में घुसना, गलत तरीके से हिरासत, चोरी जैसी धाराएं लगाई गईं।
- टकराव और रोक: दिल्ली पुलिस तीनों कार्यकर्ताओं को लेकर दिल्ली की ओर बढ़ी, लेकिन हिमाचल पुलिस ने उन्हें सोलन और फिर शोघी बैरियर (शिमला के पास NH-5 पर) पर दो बार रोका। दिल्ली पुलिस की टीम को कई घंटों तक रोका गया, वाहनों को रोकने के साथ-साथ बहस भी हुई। मामला अदालत तक पहुंचा, जहां ट्रांजिट रिमांड पर सुनवाई हुई।
- कोर्ट और अंतिम स्थिति: देर रात अदालत ने ट्रांजिट रिमांड को मंजूरी दी, लेकिन हिमाचल पुलिस ने FIR के आधार पर जांच की मांग की। लगभग 18-24 घंटे के हाईवोल्टेज ड्रामा के बाद, गुरुवार की सुबह दिल्ली पुलिस की टीम तीनों आरोपियों के साथ दिल्ली के लिए रवाना हुई। अगली सुनवाई दिल्ली में होगी।
यह घटना दो राज्यों की पुलिस के बीच एक दुर्लभ टकराव का उदाहरण प्रस्तुत करती है, जहां प्रक्रियागत नियमों को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। हिमाचल पुलिस (कांग्रेस शासित राज्य) ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को नियमों के खिलाफ बताया, जबकि दिल्ली पुलिस ने इसे वैध गिरफ्तारी के रूप में देखा।
यह पूरा मामला राजनीतिक रंग भी ले चुका है, क्योंकि युवा कांग्रेस कार्यकर्ता केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।