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दिल्ली आबकारी नीति मामले में केजरीवाल की अदालत में पेशी और जस्टिस शर्मा पर आपत्ति

दिल्ली आबकारी नीति मामले में कानूनी लड़ाई ने एक नया मोड़ लिया है। अरविंद केजरीवाल आज दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी दलीलें पेश करेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने और मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच पर अविश्वास जताते हुए खुद को इस मामले से अलग करने की याचिका दायर की है। जानें इस मामले में आगे क्या होने वाला है और प्रवर्तन निदेशालय की याचिका का क्या असर पड़ेगा।
 

दिल्ली आबकारी नीति मामले में नया मोड़

दिल्ली आबकारी नीति से संबंधित कानूनी विवाद अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुँच गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही, केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच पर अविश्वास जताते हुए खुद को इस मामले से अलग करने की याचिका दायर की है।


केजरीवाल की अदालत में उपस्थिति

आम आदमी पार्टी की कानूनी टीम के अनुसार, केजरीवाल आज व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होंगे। यह पहली बार नहीं है जब वे अपनी पैरवी कर रहे हैं, लेकिन सीबीआई द्वारा उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर उनकी दलीलें अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।


जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर आपत्ति

केजरीवाल और सिसोदिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि इस मामले को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित किया जाए। उनकी टीम का तर्क है कि न्याय के हित में इस मामले की सुनवाई किसी अन्य बेंच द्वारा की जानी चाहिए।


प्रवर्तन निदेशालय की याचिका

इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका से संबंधित कार्यवाही में, केजरीवाल और सिसोदिया को अपना जवाब दाखिल करने के लिए पखवाड़े भर से अधिक का अतिरिक्त समय दिया गया है। उच्च न्यायालय ने उन्हें 22 अप्रैल, 2026 तक अपना जवाब प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया है।


ED की याचिका उन "गैर-ज़रूरी टिप्पणियों" को हटाने से संबंधित है, जिन्हें विशेष CBI-ED कोर्ट द्वारा जांच एजेंसियों के खिलाफ की गई टिप्पणियां बताया गया है। ED ने अपनी अर्जी में कहा कि निचली अदालत की टिप्पणियां CBI मामले से असंगत थीं और एजेंसी को सुने बिना की गई थीं।


अगली सुनवाई की तारीख

उच्च न्यायालय ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि नोटिस का जवाब नहीं दिया गया, तो प्रतिवादियों के अधिकारों में कटौती की जा सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।


इससे पहले, विशेष CBI-ED कोर्ट ने पर्याप्त सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य को बरी कर दिया था; इस फैसले को CBI ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।