दिल्ली अग्निकांड: गुरुग्राम के अग्रवाल परिवार की त्रासदी
दिल्ली में भीषण अग्निकांड
दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार सुबह एक भयंकर आग ने कई परिवारों को हमेशा के लिए बर्बाद कर दिया। इस हादसे में 21 लोगों की जान गई, जिनमें 12 विदेशी और 9 भारतीय शामिल हैं। सबसे दुखद कहानी गुरुग्राम के अग्रवाल परिवार की है, जिसमें दो पीढ़ियों के आठ सदस्य आग में झुलसकर अपनी जान गंवा बैठे।
अग्रवाल परिवार दिल्ली में अपने बुजुर्ग मुखिया की देखभाल के लिए आया था। वे उस अस्पताल के निकट ठहरे थे, जहां उनके परिवार के मुखिया का इलाज चल रहा था। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
परिवार के सदस्यों की पहचान
इस त्रासदी में 48 वर्षीय विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी तरजनी, और उनकी बेटियाँ जीविशा (एंजल) और वार्या (पर्ल) शामिल थीं। परिवार के अन्य सदस्य झावेरी, अशोक अग्रवाल, कमला और प्रेम लता अग्रवाल भी इस आग में मारे गए।
गुरुग्राम के सेक्टर 46 के निवासी इस परिवार ने साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के पास 'फ्लोरिश स्टे B&B' में ठहरने का निर्णय लिया था, क्योंकि विवेक के पिता राधेश्याम अग्रवाल फेफड़ों की बीमारी के इलाज के लिए भर्ती थे।
आग लगने का समय और स्थिति
80 वर्ष से अधिक आयु के राधेश्याम पिछले कुछ समय से बीमार थे। परिवार ने उनके इलाज के दौरान अस्पताल के पास रहने का निर्णय लिया। यह निर्णय तब भयानक साबित हुआ, जब सुबह लगभग 8:30 बजे होटल में आग लग गई। अधिकारियों के अनुसार, आग तेजी से पांच मंजिला इमारत में फैल गई, जिसमें केवल एक ही निकासी मार्ग था।
तरजनी के मायके के तीन सदस्य भी राधेश्याम से मिलने आए थे और वे भी इस आग की चपेट में आ गए, जिससे मरने वालों की संख्या आठ हो गई।
परिवार का दुख और शोक
जब रिश्तेदार मैक्स अस्पताल में इकट्ठा हुए, तो वहां का माहौल गहरे शोक में डूबा हुआ था। परिवार के सदस्यों को एक ही रात में अपने परिवार की एक पूरी शाखा को खोने का दुख सहन करना मुश्किल हो रहा था।
इस त्रासदी का सबसे दुखद पहलू यह है कि राधेश्याम, जो अभी भी अस्पताल में हैं, शायद इस बात से अनजान हैं कि उन्होंने अपनी पत्नी, बेटे, बहू और दो पोतियों के साथ-साथ तीन अन्य रिश्तेदारों को खो दिया है।
सुरक्षा में खामियां
इस आग की प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों में कई खामियां उजागर हुई हैं। इनमें बिना लाइसेंस का एक रेस्टोरेंट, बंद ग्रिल, और अपर्याप्त निकासी मार्ग शामिल हैं।
जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि होटल अपनी स्वीकृत क्षमता से अधिक लोगों के साथ चल रहा था। जहां इसे केवल छह कमरे चलाने की अनुमति थी, वहीं आग लगने के समय 25 कमरे चल रहे थे।