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दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चंदे में हेराफेरी के आरोपों पर मोदी को घेरा

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी चंपत राय को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और ट्रस्ट के कार्यों की जिम्मेदारी उन्हीं की है। सिंह ने इस मुद्दे को लोगों की आस्था पर चोट के रूप में देखा और कई गंभीर सवाल उठाए। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और क्या हैं दिग्विजय सिंह के आरोप।
 

दिग्विजय सिंह का आरोप

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सोमवार को राम मंदिर के चंदे में कथित हेराफेरी के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मोदी, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और ट्रस्ट के कार्यों की जिम्मेदारी उन्हीं की है। सिंह ने इस मुद्दे को अयोध्या मंदिर में दान की चोरी के रूप में देखा, जो लोगों की आस्था पर एक बड़ा आघात है।


आस्था पर चोट

सिंह ने कहा कि यह मामला हमारी गहरी आस्था से जुड़ा है, जो अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि से संबंधित है। उन्होंने बताया कि निर्मोही अखाड़े और गोरखनाथ ट्रस्ट के महंतों ने इस उद्देश्य के लिए 150 वर्षों से अधिक समय तक संघर्ष किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि राम लला की मूर्ति अब कहाँ है, जो मंदिर को उसकी पहचान देती थी?


चोरी और शिकायतें

सिंह ने आरोप लगाया कि दान की राशि में चोरी हो रही है, जिसमें पिछले 40 दिनों में 71 बार चोरी की घटनाएँ हुई हैं। उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज भी गायब हो गया है। जब अकाउंटेंट महिपाल सिंह ने शिकायत की, तो चंपत राय ने उन्हें हटा दिया। सिंह ने यह भी बताया कि महिपाल सिंह और दीनानाथ वर्मा, जो पहले ट्रस्ट से जुड़े थे, RSS के कार्यकर्ता थे और चंपत राय द्वारा नियुक्त किए गए थे।


कमीशन की मांग

सिंह ने कहा कि एक ईमानदार इंजीनियर ने चंपत राय से 40 प्रतिशत कमीशन की शिकायत की थी। अगले दिन उन्हें काम से हटा दिया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ट्रस्ट का गठन उनकी देखरेख में हुआ था। सिंह ने आरोप लगाया कि मोदी चंपत राय जैसे व्यक्तियों को बचा रहे हैं और ट्रस्ट के सदस्यों की नियुक्ति भी उन्हीं ने की थी।