दिग्विजय सिंह का राम मंदिर चंदा विवाद पर बड़ा बयान
राम मंदिर चंदा विवाद में नया मोड़
राम मंदिर के चंदे को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस संदर्भ में कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह अयोध्या में मुकदमा दायर करने का निर्णय ले चुके हैं। उनका आरोप है कि उनके द्वारा दिया गया दान गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है और उन्हें वह धन वापस मिलना चाहिए ताकि वह इसे 'रामलय ट्रस्ट' में जमा कर सकें। दिग्विजय ने यह भी कहा कि उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं है, क्योंकि वह बीजेपी के नियंत्रण में है, इसलिए वह पुलिस स्टेशन नहीं जाएंगे, बल्कि कोर्ट का रुख करेंगे.
दान की पारदर्शिता पर सवाल
दिग्विजय सिंह ने बताया कि राम मंदिर के लिए धन जुटाने के दो अभियान चलाए गए थे। उन्होंने पहले चरण में भी योगदान दिया था, जब आडवाणी जी की रथ यात्रा हुई थी। उनका कहना है कि राम मंदिर और भगवान राम में उनकी आस्था है, लेकिन पहले चरण के धन संग्रह का कोई हिसाब नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद फिर से धन जुटाने का कार्य शुरू हुआ। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने एक अभियान चलाया, लेकिन उन्होंने इसमें कोई योगदान नहीं दिया क्योंकि उन्हें उन पर भरोसा नहीं है।
दान की राशि और उसके उपयोग पर चिंता
उन्होंने आगे कहा कि चूंकि उस समय के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 1 लाख रुपये दान किए थे, इसलिए उन्होंने 1,11,000 रुपये दान किए और नरेंद्र मोदी जी को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि दान की राशि ट्रस्ट में सही तरीके से जमा हो। उन्होंने कहा कि दान देने का उनका उद्देश्य भगवान राम में आस्था और भव्य मंदिर की इच्छा थी। लेकिन अब जो शिकायतें आ रही हैं, वे चिंताजनक हैं। चंपत राय जी, जो ट्रस्ट के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार थे, ने कर्मचारियों को ₹10,000–₹15,000 की मासिक सैलरी पर रखा, फिर भी रोजाना इकट्ठा होने वाले दान का 10% से 20% हिस्सा गायब हो जाता था।
भक्ति पर आघात का आरोप
सिंह ने यह भी कहा कि इस मामले में बैंक अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं। यह भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति पर एक बड़ा आघात है। इसलिए, उन्होंने अयोध्या में मुकदमा करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि उनके द्वारा दिए गए दान का गलत इस्तेमाल किया गया है और इसे उन्हें वापस किया जाना चाहिए ताकि वह इसे 'रामलय ट्रस्ट' में जमा कर सकें।