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दसवें रक्षा बल वयोवृद्ध दिवस पर पूर्व सैनिकों का सम्मान

दसवें रक्षा बल वयोवृद्ध दिवस के अवसर पर देशभर में पूर्व सैनिकों का सम्मान किया गया। दिल्ली में आयोजित मुख्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्व सैनिकों के साहस और बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने युवाओं को मार्गदर्शन देने और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने का आग्रह किया। इस अवसर पर ऑपरेशन पवन में भाग लेने वाले सैनिकों के योगदान को भी मान्यता दी गई। जानें इस विशेष दिन की महत्वपूर्ण बातें और पूर्व सैनिकों की भूमिका के बारे में।
 

दसवें रक्षा बल वयोवृद्ध दिवस का आयोजन

मंगलवार को देशभर में दसवें रक्षा बल वयोवृद्ध दिवस के अवसर पर पूर्व सैनिकों के लिए रैलियों, पुष्पांजलि समारोहों, शिकायत निवारण काउंटरों और सहायता केंद्रों का आयोजन किया गया। मुख्य समारोह दिल्ली कैंट के मानेकशॉ सेंटर में हुआ, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से लगभग 2,500 पूर्व सैनिक शामिल हुए। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया कि अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों के साहस, बलिदान और समर्पण को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने उन्हें राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ और भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। राजनाथ सिंह ने पूर्व सैनिकों से युवाओं का मार्गदर्शन करने, अग्निवीरों और युवा सैनिकों को सही दिशा दिखाने, और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने का आग्रह किया।


पूर्व सैनिकों का अनुभव और योगदान

राजनाथ सिंह ने उपस्थित पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय में पूर्व सैनिकों का अनुभव और नेतृत्व देश के लिए अमूल्य है। उन्होंने कहा कि समाज, विशेषकर युवाओं को पूर्व सैनिकों से सीखने की आवश्यकता है। चाहे वह शिक्षा, कौशल विकास, आपदा प्रबंधन, सामुदायिक नेतृत्व या नवाचार हो, पूर्व सैनिकों की भागीदारी आने वाली पीढ़ियों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। रक्षा मंत्री ने लगभग 40 वर्ष पहले श्रीलंका में शांति स्थापना के लिए भारतीय शांति सेना (आईपीकेएफ) द्वारा चलाए गए ऑपरेशन पवन में भाग लेने वाले पूर्व सैनिकों को याद किया।


ऑपरेशन पवन का महत्व

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने अद्वितीय साहस का प्रदर्शन किया और कई सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी। उनके बलिदान को वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार न केवल ऑपरेशन पवन में भाग लेने वाले शांति सैनिकों के योगदान को स्वीकार कर रही है, बल्कि उनके योगदान को मान्यता देने की प्रक्रिया में भी है। जब प्रधानमंत्री मोदी ने 2015 में श्रीलंका का दौरा किया, तब उन्होंने आईपीकेएफ स्मारक पर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। अब नई दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में भी आईपीकेएफ सैनिकों के योगदान को मान्यता दी जा रही है।