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दवा विक्रेताओं की हड़ताल: 15 लाख दुकानें रहेंगी बंद

आज देशभर में दवा विक्रेताओं ने हड़ताल का आह्वान किया है, जिसमें 15 लाख से अधिक दुकानें बंद रहेंगी। यह हड़ताल अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री, कॉर्पोरेट कंपनियों की चुनौतियों और एआई द्वारा बनाए गए प्रेसक्रिप्शन के खिलाफ है। AIOCD के अध्यक्ष जगन्नाथ शिंदे ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि ऑनलाइन बिक्री के कारण फर्जी दवाओं का बाजार में बढ़ता प्रभाव युवाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गया है। जानें इस हड़ताल के पीछे की पूरी कहानी।
 

दवा विक्रेताओं की राष्ट्रव्यापी हड़ताल

आज देशभर में दवा के खुदरा विक्रेता हड़ताल पर हैं और अपनी दुकानों को बंद रखेंगे। यह हड़ताल अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री, कॉर्पोरेट कंपनियों की चुनौतियों और एआई द्वारा बनाए गए प्रेसक्रिप्शन के खिलाफ की जा रही है। 'ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स' ने इस संबंध में जानकारी दी। ठाणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में AIOCD के अध्यक्ष जगन्नाथ शिंदे ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान जारी की गई अधिसूचनाओं को वापस लेने की मांग को लेकर यह हड़ताल की जा रही है, जिनके कारण ऑनलाइन दवा बिक्री में वृद्धि हुई है।


फर्जी दवाओं की बिक्री पर चिंता

जगन्नाथ शिंदे ने कहा, "बंद के दौरान अस्पतालों से जुड़ी दवा की दुकानें खुली रहेंगी और इमरजेंसी दवा सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी।" उन्होंने बताया कि ऑनलाइन बिक्री के कारण बाजार में बिना डॉक्टर के पर्चे के फर्जी दवाएं, एंटीबायोटिक्स और प्रतिबंधित दवाएं बिक रही हैं, जो युवाओं के लिए गंभीर खतरा बन गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री देश के लिए खतरनाक हो गई है और इसे रोकने की आवश्यकता है।


ऑनलाइन कंपनियों की भारी छूट

AIOCD के अध्यक्ष ने बताया कि केंद्र सरकार ने महामारी के दौरान दवाओं की आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए विशेष छूट दी थी, लेकिन अब भी ये प्रावधान जारी हैं। ऑनलाइन कंपनियां इस छूट का लाभ उठाकर 20 से 50 प्रतिशत तक की छूट देकर छोटे दवा विक्रेताओं का व्यवसाय प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बुधवार शाम से दुकानें फिर से खुलनी शुरू हो जाएंगी।


दवा विक्रेताओं की चिंताएं