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दतिया उपचुनाव में शिवसेना का नरोत्तम मिश्रा को प्रस्ताव, भाजपा की हलचल तेज

मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। शिवसेना ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया है, जबकि भाजपा ने आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। मिश्रा के समर्थकों ने टिकट न मिलने पर विरोध प्रदर्शन किया। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और आगामी चुनाव की तैयारियों के बारे में।
 

दतिया विधानसभा उपचुनाव की राजनीतिक हलचल

मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा टिकट न दिए जाने के बाद, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को दतिया उपचुनाव में उम्मीदवार बनने का प्रस्ताव दिया है।


शिवसेना (उबाठा) के मध्य प्रदेश प्रमुख सुनील शर्मा ने फोन पर बातचीत में बताया कि उन्होंने पार्टी के नेतृत्व से चर्चा के बाद यह प्रस्ताव मिश्रा को भेजा है। शर्मा के अनुसार, यदि मिश्रा इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और अन्य वरिष्ठ नेता मध्य प्रदेश में उनके समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे।


सुनील शर्मा ने यह भी कहा कि उन्होंने पार्टी की मध्य प्रदेश आईटी सेल के प्रमुख नाहर सिंह गौर को निर्देश दिए हैं कि वे मिश्रा को भेजे गए निमंत्रण का वीडियो संदेश सोशल मीडिया पर साझा करें। वर्तमान में शिवसेना (उबाठा) के पास महाराष्ट्र विधानसभा में 20 विधायक और लोकसभा में तीन सांसद हैं, जबकि हाल ही में छह लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल हो गए हैं।


यह प्रस्ताव भाजपा द्वारा दतिया उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित करने के एक दिन बाद आया है। यह उपचुनाव 30 जुलाई को होने वाला है, और भाजपा ने शुक्रवार को तिवारी के नाम की घोषणा की थी।


नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने से उनके समर्थकों ने क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया। समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया, स्थानीय बाजार बंद कराए और भाजपा के कार्यालय पर ताला लगा दिया। इस दौरान हुई हिंसा में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भाजपा उम्मीदवार को बदलने की किसी भी संभावना से इनकार किया है।


दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति तब उत्पन्न हुई जब कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई गई, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई।