दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की शुरुआत में देरी, किसानों के लिए चिंता का विषय
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की शुरुआत में देरी से किसानों में चिंता बढ़ गई है। IMD के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार, केरल में मॉनसून का आगमन अब 5-6 जून के बाद ही संभव है। इस वर्ष सामान्य से कम बारिश की संभावना है, जिसका मुख्य कारण प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति है। जानें मॉनसून की शुरुआत के लिए आवश्यक शर्तें और इसके प्रभावों के बारे में।
Jun 2, 2026, 12:44 IST
मॉनसून का इंतजार
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून, जिसे भारत की वार्षिक जीवनरेखा माना जाता है, केरल में अपने आगमन की तारीख में एक बार फिर बदलाव आया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम मौसम मॉडल के अनुसार, मॉनसून की शुरुआत अब 5-6 जून के बाद ही संभव है। आईएमडी के ग्लोबल फोरकास्ट सिस्टम (GFS) मॉडल के अनुसार, दक्षिण भारत में तेज ऊपरी-स्तर की हवाएं तब तक सक्रिय नहीं होंगी, जिससे मॉनसून की शुरुआत अपेक्षाकृत कमजोर और धीमी रहने की संभावना है।
मॉनसून का महत्व
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हिंद महासागर से गर्म और नमी से भरी हवाएं लाता है, जो जून से सितंबर के बीच देश में अधिकांश वर्षा का कारण बनती हैं। यह कृषि के लिए आवश्यक है, जलाशयों को भरता है और गर्मियों की तपिश से राहत प्रदान करता है।
IMD का नवीनतम पूर्वानुमान
IMD का ग्लोबल फोरकास्ट सिस्टम एक उन्नत कंप्यूटर मॉडल है, जिसका उपयोग मौसम के पूर्वानुमान के लिए किया जाता है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, एक पश्चिमी विक्षोभ, जो नमी से भरी हवाएं लाता है, को पहले हटना होगा ताकि दक्षिण भारत में ऊपरी-स्तर की पूर्वी हवाएं मजबूत हो सकें। इस बीच, केरल में मॉनसून का प्रारंभिक प्रवाह कमजोर रहने की संभावना है।
मॉनसून की शुरुआत की शर्तें
IMD द्वारा मॉनसून की आधिकारिक घोषणा के लिए तीन प्रमुख शर्तें पूरी होनी चाहिए: केरल के कम से कम 60% मौसम केंद्रों पर लगातार बारिश होना, अरब सागर के ऊपर पश्चिमी हवाओं का एक निश्चित गति से चलना, और आसमान में पर्याप्त बादल होना। वर्तमान में, बारिश और बादलों की स्थिति संतोषजनक है, लेकिन पश्चिमी हवाएं कमजोर पड़ रही हैं।
मौसम की भविष्यवाणी
हालांकि मॉनसून का आगमन निकट है, लेकिन इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठता है। IMD ने इस वर्ष सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया है, जिसका कारण प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति है। पहले, IMD ने मॉनसून की बारिश को लंबी अवधि के औसत (LPA) का 92% रहने का अनुमान लगाया था, जिसे अब घटाकर 90% कर दिया गया है।
किसानों के लिए चिंता
उत्तरी और मध्य भारत में गर्मी की लहरें जारी हैं, जिससे बुवाई के मौसम की तैयारी कर रहे किसानों के लिए समय पर बारिश अत्यंत आवश्यक है। मौजूदा स्थिति से यह स्पष्ट है कि मॉनसून की शुरुआत धीमी होगी, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे इसकी गति बढ़ने की उम्मीद है।