☰
×

दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई, उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत

दक्षिण-पश्चिम मानसून का समापन हो चुका है, लेकिन दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून की गतिविधियां जारी हैं। इस वर्ष सामान्य से कम बारिश हुई है, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर प्रभाव पड़ सकता है। अल नीनो की स्थिति भी मौसम पर असर डाल सकती है। जानें इस मौसम के बारे में और किसानों पर इसके संभावित प्रभाव के बारे में।
 

दक्षिण-पश्चिम मानसून का समापन


भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 15 अक्टूबर 2026 को यह पुष्टि की कि दक्षिण-पश्चिम मानसून देश से विदा हो चुका है। इस प्रकार, चार महीने तक चलने वाले मानसूनी बारिश के मौसम का औपचारिक समापन हो गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अब बारिश नहीं होगी। विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों में उत्तर-पूर्वी मानसून के सक्रिय होने से बारिश का एक नया चरण शुरू हो गया है।


मानसून के दौरान बारिश की कमी

IMD के अनुसार, 15 अक्टूबर को दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई पूरी हुई। इस वर्ष मानसून के दौरान देशभर में सामान्य से कम बारिश हुई। जून से सितंबर के बीच, कुल बारिश दीर्घकालिक औसत से लगभग 13 प्रतिशत कम रही। इस कमी का प्रभाव कृषि, जलाशयों और भूजल की स्थिति पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में बारिश की मात्रा और जल संसाधनों पर निर्भर करेगा।


अल नीनो की चिंता

मानसून की विदाई के साथ, अल नीनो की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। अल नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका प्रभाव विश्व के कई क्षेत्रों के मौसम पर पड़ सकता है। भारत में, अल नीनो की स्थिति अक्सर कमजोर मानसूनी बारिश से जुड़ी रही है, लेकिन इसका प्रभाव हर बार एक जैसा नहीं होता।


पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने जुलाई 2026 में संसद में बताया कि जून में अल नीनो की स्थिति कमजोर थी, जबकि जुलाई में यह मध्यम स्तर तक मजबूत हुई। विभाग ने अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच इसके और मजबूत होने की संभावना जताई है। हालांकि, अल नीनो का वास्तविक प्रभाव समुद्र और वातावरण की बदलती परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।


उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत

दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के साथ, दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में उत्तर-पूर्वी मानसून सक्रिय हो गया है। IMD के अनुसार, तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। उत्तर-पूर्वी मानसून का मौसम आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर तक रहता है और यह दक्षिण भारत में बारिश के लिए महत्वपूर्ण होता है।


तमिलनाडु में सालाना बारिश का एक बड़ा हिस्सा इसी मानसून से प्राप्त होता है। इसलिए, दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के बावजूद, दक्षिण भारत के किसानों और आम लोगों के लिए बारिश का मौसम समाप्त नहीं हुआ है।


किसानों पर प्रभाव

मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने पर कृषि और जल संसाधनों पर प्रभाव पड़ सकता है। जिन क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, वहां मिट्टी में नमी, जलाशयों में पानी और रबी फसलों की बुवाई में चुनौतियां आ सकती हैं। दूसरी ओर, दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश कुछ फसलों और जल स्रोतों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


हालांकि, किसानों पर वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए क्षेत्रवार बारिश, मिट्टी में नमी और जलाशयों की स्थिति को देखना आवश्यक है। केवल अल नीनो की मौजूदगी के आधार पर फसल उत्पादन में कमी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।


भविष्य का मौसम

हालांकि दक्षिण-पश्चिम मानसून विदा हो चुका है, लेकिन दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग अल नीनो की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। आने वाले समय में समुद्र के तापमान, वायुमंडलीय परिस्थितियों और क्षेत्रवार बारिश के आंकड़ों के आधार पर मौसम का आकलन किया जाएगा।


कुल मिलाकर, 2026 के मानसूनी मौसम का समापन सामान्य से कम बारिश के साथ हुआ है। अब दक्षिण भारत के लिए उत्तर-पूर्वी मानसून महत्वपूर्ण रहेगा, जबकि अल नीनो की स्थिति आने वाले महीनों के मौसम को प्रभावित कर सकती है।