दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संघर्ष की जटिलताएँ
दक्षिण एशिया में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल दो देशों की लड़ाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक राजनीति की बड़ी तस्वीर भी है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने तालिबान को भारत का सहयोगी बताया है, जबकि रूस के विचारक ने इसे अमेरिका की रणनीति से जोड़ा है। भारत ने हमेशा शांति की कामना की है, लेकिन क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। क्या यह संघर्ष वास्तव में वैश्विक शक्तियों के हितों से जुड़ा है? जानें इस जटिल स्थिति के बारे में।
Feb 28, 2026, 17:40 IST
दक्षिण एशिया में तनाव का नया अध्याय
जब दो पक्षों के बीच संघर्ष होता है, तो तीसरा पक्ष अक्सर लाभ उठाता है। दक्षिण एशिया में वर्तमान स्थिति को देखते हुए, कई विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच का टकराव केवल दो देशों की लड़ाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक राजनीति की बड़ी तस्वीर भी हो सकती है। हाल ही में, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का धैर्य अब समाप्त हो चुका है और इसे उन्होंने खुली जंग का नाम दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तालिबान भारत का सहयोगी बन चुका है। इस बयान ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है।
भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा?
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाने वाले विचारक एलेक्जेंडर डूगिन ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उनका कहना है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता संघर्ष एक बड़ी भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। डूगिन का मानना है कि इस संघर्ष के पीछे अमेरिका की रणनीति हो सकती है, जिसका उद्देश्य ब्रिक्स को कमजोर करना है। उनके अनुसार, वर्तमान बहुध्रवीय व्यवस्था में ब्रिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका है, और अमेरिका इस गठबंधन को कमजोर करने की कोशिश कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस संघर्ष में विभिन्न देशों के हित जुड़े हुए हैं, जिसमें पाकिस्तान के पीछे चीन और अफगानिस्तान के पीछे भारत का नाम लिया जा रहा है।
भारत की स्थिति
हालांकि, भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि वह किसी भी संघर्ष या युद्ध का समर्थन नहीं करता है और क्षेत्र में शांति की कामना करता है। अफगानिस्तान में भारत ने कई विकास परियोजनाओं, जैसे सड़कें, बांध और शिक्षा से जुड़े कार्य किए हैं। इसलिए, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि अफगानिस्तान की राजनीति में भारत का प्रभाव रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत किसी युद्ध का हिस्सा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान और तालिबान के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में, पाकिस्तान को अपनी सीमाओं के भीतर कई आतंकवादी हमलों का सामना करना पड़ा है। कई रिपोर्टों में कहा गया है कि जिन संगठनों को पाकिस्तान ने पहले समर्थन दिया, वही अब उसके लिए चुनौती बन गए हैं।
संघर्ष का प्रभाव
डूगिन ने अपने बयान में एक और महत्वपूर्ण बिंदु उठाया है। उन्होंने इसे अमेरिका की 'अमेरिकी फर्स्ट' नीति से जोड़ा और यह संकेत दिया कि यदि दक्षिण एशिया में बड़ा संघर्ष शुरू होता है, तो इसका सीधा असर ब्रिक्स पर पड़ेगा, क्योंकि इस संगठन में भारत और चीन दोनों प्रमुख सदस्य हैं। यदि भारत और चीन किसी तरह अलग-अलग उलझते हैं या क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है, तो इससे ब्रिक्स का आर्थिक और रणनीतिक एजेंडा प्रभावित हो सकता है।
संघर्ष की शुरुआत
पिछले हफ्ते, 21-22 फरवरी की रात को, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में एयर स्ट्राइक कर 80 से अधिक तालिबान आतंकियों को मारने का दावा किया। तालिबान ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 18 लोग मारे गए हैं।
पाकिस्तान का गुस्सा
पाकिस्तान का कहना है कि वह अफगानिस्तान की ओर से बेगुनाह लोगों पर किए गए हमलों से गुस्से में है और इसी के प्रतिशोध के लिए युद्ध में उतरा है। इस तरह उसने अपनी भावनाओं को इस ऑपरेशन का नाम दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान ने सीमा से लगे क्षेत्रों जैसे चित्राल, खैबर, मोहमद, कुर्रम और बाजौर में हमले किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
पाकिस्तान और तालिबान के बीच जारी संघर्ष में ईरान ने मध्यस्थता की पेशकश की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत में मध्यस्थता करने को तैयार है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से मानवाधिकार कानून के तहत अपने दायित्वों का पालन करने का आग्रह किया है। मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने सीमा संघर्ष और हवाई हमलों के बाद समस्याओं के समाधान के लिए आपसी बातचीत की अपील की है। रूस, तुर्की और चीन ने भी संघर्ष को तुरंत रोकने की बात कही है।