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त्रिपुरा के माछीमार गाँव में एंजेल चकमा की दुखद कहानी

त्रिपुरा के माछीमार गाँव में एंजेल चकमा की दुखद कहानी ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है। जब उनकी मृत देह गाँव पहुंची, तो परिवार के सदस्यों ने गहरा शोक व्यक्त किया। पूर्व सांसद तरुण विजय ने परिवार को सांत्वना दी और न्याय की मांग की। इस घटना ने न केवल परिवार को प्रभावित किया, बल्कि पूरे समाज में मानवीय अपराधों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई है। जानें इस दुखद घटना के पीछे की कहानी और परिवार की न्याय की खोज।
 

एंजेल चकमा की अंतिम विदाई

त्रिपुरा के माछीमार गाँव में अब एंजेल चकमा की वापसी संभव नहीं होगी। बांग्लादेश की सीमा और शिक्षा की कमी के चलते, त्रिपुरा और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के बच्चे अपने सपनों को साकार करने के लिए देहरादून जैसे स्थानों पर आते हैं। लेकिन जब उनकी मृत देह गाँव लौटती है, तो परिवार के सदस्यों के लिए शब्दों की कमी हो जाती है। पूर्व सांसद तरुण विजय जब देहरादून से पहुँचे, तो एंजेल के घर में गहरा सन्नाटा था। उसके पिता, भाई और दादा निकटवर्ती बौद्ध मंदिर में सात दिवसीय पूजा में व्यस्त थे। एंजेल की माँ, जिसे उसने आश्वासन दिया था कि वह एक लाख रुपए मासिक पर नौकरी पा चुका है, आज अपने बेटे की अंतिम शांति की पूजा में गई थी।


 


तरुण विजय का परिवार से मिलना


तरुण विजय ने इस दुखद माहौल में एंजेल के पिता से मुलाकात की, और दोनों की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड और त्रिपुरा की सरकारें एक-दूसरे के संपर्क में हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं और चकमा परिवार को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है। एंजेल के पिता ने हाथ जोड़कर केवल न्याय की मांग की। तरुण प्रसाद चकमा ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि पुलिस जांच का दायरा बढ़ाया जाए। सेलाकुई पुलिस ने उनके बेटे से एफआईआर नहीं ली, और जब उन्होंने जोर दिया, तो दो दिन बाद एफआईआर दी गई, जिसमें उन्हें डांट भी पड़ी। उन्होंने सवाल उठाया कि सौरभ बरुआ, जो एंजेल के मकान मालिक थे और जिनके साथ एंजेल का झगड़ा हुआ था, की भूमिका की जांच क्यों नहीं की जा रही है?


 


मानवीय अपराध पर चिंता


तरुण विजय ने चकमा परिवार को आश्वस्त किया कि उत्तराखंड और पूर्वोत्तर एक ही हैं, और वे इन मुद्दों को सरकार के सामने उठाएंगे। एंजेल चकमा के परिवार ने तरुण विजय का धन्यवाद किया कि उन्होंने उनके गाँव आकर सांत्वना दी। तरुण विजय ने कहा कि यह एक मानवीय अपराध है और इसे राजनीति का शिकार नहीं बनने देना चाहिए। जो लोग इस घटना को उत्तराखंड और हिंदुत्व बनाम पूर्वोत्तर का रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, वे सफल नहीं होंगे।