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तेल कंपनियों को बढ़ते घाटे के बावजूद मुनाफा, कीमतों में हो सकती है और वृद्धि

तेल विपणन कंपनियों ने हाल ही में बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद उन्हें प्रतिदिन 600 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घाटे को पूरा करने के लिए कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। पिछले वित्त वर्ष में इन कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जानें इस मुद्दे की पूरी जानकारी और इसके संभावित प्रभाव।
 

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का संकट

नई दिल्ली। तेल विपणन कंपनियों ने बताया है कि 15 मई से अब तक पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि के बावजूद, उन्हें प्रतिदिन 600 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।


पेट्रोल-डीजल होगा इतने रुपये महंगा! तेल कंपनियों ने दिए खतरनाक संकेत


इस स्थिति में यह संभावना जताई जा रही है कि इस घाटे को पूरा करने के लिए पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 9 से 10 रुपये की और वृद्धि हो सकती है।


पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का पूर्वानुमान

15 मई से पहले, तेल कंपनियों ने कहा था कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण उन्हें प्रतिदिन 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। हाल ही में 12 दिनों में 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद, यह घाटा 1000 करोड़ रुपये से घटकर 600 करोड़ रुपये पर आ गया है। इसलिए, आगे और कीमतों में वृद्धि की संभावना है।


तेल कंपनियों का मुनाफा

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कंपनियों द्वारा बताई गई अंडर रिकवरी में एलपीजी और एयर टर्बाइन फ्यूल की लागत भी शामिल है, जिस पर सरकार सब्सिडी देती है। विशेषज्ञ यह भी सवाल उठा रहे हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद, तेल कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया।


2025-26 में तेल कंपनियों की कमाई

अंतिम तिमाही में, देश की तीन प्रमुख तेल कंपनियों - आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक मुनाफा कमाया। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में इन कंपनियों ने मिलकर 77,280 करोड़ रुपये की कमाई की।


28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के कारण, मार्च में कच्चे तेल की औसत खरीद कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल रही। फरवरी में यह 69 डॉलर और जनवरी में 63 डॉलर प्रति बैरल थी। अप्रैल में यह बढ़कर 114 डॉलर हो गई।


अंडर रिकवरी की जानकारी का अभाव

हाल ही में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत 97 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई। विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोल-डीजल की लागत में कच्चे तेल की कीमत का 90 प्रतिशत योगदान होता है।


एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि तेल कंपनियां अंडर रिकवरी के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं करतीं, जिससे यह स्पष्ट नहीं होता कि इसमें केवल पेट्रोल-डीजल शामिल हैं या अन्य आइटम भी।


वित्त वर्ष 2025-26 में मुनाफा

आईओसी —– 11,377.51 करोड़


बीपीसीएल —- 3,191 करोड़


एचपीसीएल—- 4,901 करोड़


वित्त वर्ष 2025-26 में कुल मुनाफा

आईओसी —— 36,802 करोड़


बीपीसीएल—- 23,303 करोड़


एचपीसीएल— 17,175 करोड़