तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी को झटका, बागी सांसदों ने नया गुट बनाने का किया फैसला
ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं
ममता बनर्जी, जो मोदी विरोधी विपक्षी इंडिया गठबंधन को मजबूत करने के लिए बैठक में शामिल हुई थीं, को एक बड़ा झटका तब लगा जब तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने अलग से बैठक कर पार्टी से अलग होकर नया गुट बनाने का निर्णय लिया। इसके अलावा, कई सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से भी मुलाकात की, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी शामिल थे। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है और ममता बनर्जी के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पार्टी में असंतोष का उभार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। पहले यह संकट कोलकाता तक सीमित था, लेकिन अब इसका केंद्र दिल्ली बन गया है। सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के 28 लोकसभा सांसदों में से लगभग 20 सांसद दिल्ली में एक गुप्त स्थान पर जुटे हैं और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ रणनीति बना रहे हैं। यह सब तब हो रहा है जब ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने दिल्ली पहुंचे हैं.
बागी सांसदों के विकल्प
सूत्रों के अनुसार, बागी सांसद दो विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। पहला, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर खुद को अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली संसदीय इकाई से अलग एक स्वतंत्र गुट के रूप में मान्यता दिलाने का प्रयास करना। दूसरा विकल्प सामूहिक इस्तीफे का है। यदि इनमें से कोई योजना लागू होती है, तो यह ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका होगा.
बागी सांसदों की संख्या पर विवाद
हालांकि, ममता बनर्जी के करीबी सूत्रों का कहना है कि बागी खेमे में 20 सांसद नहीं हैं। उनका तर्क है कि यदि संख्या पर्याप्त नहीं हुई तो बागी सांसदों पर दल बदल विरोधी कानून लागू हो सकता है। इसके बावजूद, पार्टी के भीतर असंतोष की बढ़ती भावना चिंता का विषय बनी हुई है.
सुखेंदु शेखर राय का इस्तीफा
तृणमूल कांग्रेस को एक और बड़ा झटका तब लगा जब वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि जनता ने तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन के खिलाफ फैसला दिया है।
ममता बनर्जी का संगठन में फेरबदल
इस बीच, ममता बनर्जी ने संगठन में बड़े फेरबदल की कोशिशें शुरू कर दी हैं। अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव बनाए रखते हुए, पार्टी ने डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अभिषेक बनर्जी के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
तृणमूल कांग्रेस का संकट
पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के अंदर सबसे ज्यादा नाराजगी अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को लेकर है। ममता बनर्जी अब संगठन में संतुलन बनाने और अपनी विश्वसनीयता को बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन सांसदों और नेताओं की नाराजगी के खुलासे से यह स्पष्ट है कि तृणमूल कांग्रेस एक गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है.