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तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा में परीक्षा सुधार बिल का समर्थन किया, लेकिन सरकार की नाकामियों की आलोचना की

तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' का समर्थन किया, लेकिन साथ ही सरकार की 12 साल की विफलताओं की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केवल कानून को सख्त करने से परीक्षाओं की शुचिता में सुधार नहीं होगा। बनर्जी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह समस्याओं का समाधान करने के बजाय बार-बार कानून बदलती है। इस चर्चा में उन्होंने परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा में सरकार की नाकामी को उजागर किया।
 

तृणमूल कांग्रेस का समर्थन और सरकार की आलोचना

तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने 31 जनवरी, 2026 को लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' के लिए अपनी पार्टी का समर्थन जताया। हालांकि, उन्होंने सरकार की 12 साल की विफलताओं की भी कड़ी आलोचना की। चर्चा के दौरान बनर्जी ने कहा कि भले ही TMC ने निष्पक्ष परीक्षाओं को बढ़ावा देने वाले इस बिल का समर्थन किया है, लेकिन इसे अनियमितताओं से निपटने के लिए केंद्र के दृष्टिकोण की स्वीकृति नहीं माना जाना चाहिए। उनका तर्क था कि केवल कानून को सख्त करने से सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने में बार-बार हुई विफलताओं के लिए जिम्मेदारी नहीं ली जा सकती।


 


उन्होंने स्पष्ट किया कि हम इस बिल का समर्थन करते हैं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि इसका मतलब यह नहीं है कि हम उन लोगों की प्रशंसा करें जो समस्याओं के समाधान के लिए केवल दिखावे के तौर पर आते हैं। हर छात्र को यह विश्वास होना चाहिए कि परीक्षाएँ निष्पक्ष होंगी, और हर माता-पिता को यह यकीन होना चाहिए कि सफलता मेहनत और ईमानदारी से तय होती है, न कि पैसे या संगठित अपराध से। लेकिन इस बिल का समर्थन जिम्मेदारी का विकल्प नहीं हो सकता।


 


बनर्जी ने आगे कहा कि एक मजबूत कानून की आवश्यकता है, लेकिन यदि सिस्टम की कमियों के कारण परीक्षाओं की शुचिता पर सवाल उठते रहेंगे, तो केवल कानून से काम नहीं चलेगा। चाहे कितने भी सख्त संशोधन क्यों न किए जाएं, इससे उन लाखों छात्रों का विश्वास नहीं लौटेगा जो पहले ही टूट चुका है। उन्होंने बीजेपी सरकार पर परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित रखने में असफल रहने का आरोप लगाया और कहा कि यह बिल कोई समाधान नहीं है, बल्कि यह नाकामी को स्वीकार करने जैसा है।


 


बनर्जी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह समस्याओं का समाधान करने के बजाय बार-बार कानूनों में बदलाव करती है। उन्होंने कहा कि जब भी सरकार कामकाज में विफल होती है, तो वह कानून बदल देती है या सज़ा बढ़ा देती है। कामकाज को हेडलाइन से नहीं, बल्कि परिणामों से मापा जाता है। इससे पहले, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ हो रहे व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच इस बिल को पेश किया।