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तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा की

तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मेनका गुरुस्वामी का नाम प्रमुख है। उनके योगदान को लेकर चर्चा हो रही है, खासकर भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के खिलाफ उनकी कानूनी लड़ाई के संदर्भ में। भाजपा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, आरोप लगाते हुए कि तृणमूल के आधे उम्मीदवार गैर-बंगाली हैं। इस चुनावी परिदृश्य में, तृणमूल कांग्रेस ने संवैधानिक मूल्यों और सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।
 

राज्यसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस का नया कदम

ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। इस निर्णय ने पार्टी में उत्साह का संचार किया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस घटनाक्रम में प्रमुखता से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मेनका गुरुस्वामी का नाम उभरकर सामने आया है, जो संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और ऐतिहासिक कानूनी हस्तक्षेपों के लिए जानी जाती हैं। तृणमूल कांग्रेस द्वारा घोषित अन्य नामों में पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, पश्चिम बंगाल के पूर्व पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और प्रसिद्ध अभिनेत्री कोएल मलिक शामिल हैं। पार्टी ने कहा है कि ये नाम लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं।


डॉ. मेनका गुरुस्वामी का योगदान

डॉ. मेनका गुरुस्वामी उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और मानवाधिकारों तथा संवैधानिक मूल्यों की सशक्त आवाज मानी जाती हैं। उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के खिलाफ संवैधानिक चुनौती में रहा, जिसमें 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सहमति से बने समान लिंग संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। इस निर्णय को भारत में समानता और गरिमा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया। मेनका ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, निजता और समानता के अधिकारों की जोरदार पैरवी की।


कानूनी क्षेत्र में मेनका की पहचान

उनकी पहचान केवल इसी मामले तक सीमित नहीं है। उन्होंने टीएसआर सुब्रमण्यम बनाम भारत संघ मामले में प्रशासनिक सुधारों के पक्ष में दलीलें दीं, अगस्ता वेस्टलैंड मामले में पारदर्शिता के मुद्दों पर कानूनी बहस में भाग लिया, और सलवा जुडूम मामले में मानवाधिकारों के संरक्षण की बात उठाई।


ऐतिहासिक संभावनाएं

यदि डॉ. मेनका गुरुस्वामी निर्वाचित होती हैं, तो वह भारत की पहली एलजीबीटीक्यू प्लस सांसद बन सकती हैं। यह संभावना उनके नाम को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है। उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है, और उनका चित्र ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के रोड्स हाउस में प्रदर्शित है।


अन्य उम्मीदवारों की भूमिका

बाबुल सुप्रियो, जो पहले केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं, वर्तमान में राज्य सरकार में मंत्री हैं। उनकी प्रशासनिक अनुभव और राष्ट्रीय राजनीति की समझ पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, राजीव कुमार, जो पश्चिम बंगाल के पूर्व पुलिस महानिदेशक हैं, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे की गहरी समझ रखते हैं। कोएल मलिक, जो बंगाली सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री हैं, सांस्कृतिक पहचान और जनसंपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण चेहरा हैं।


भाजपा की प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों की घोषणा के तुरंत बाद, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने आरोप लगाया कि तृणमूल के आधे उम्मीदवार गैर-बंगाली हैं, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित बंगाल समर्थक रुख के विपरीत है। भाजपा ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय अस्मिता का मुद्दा केवल चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।


राजनीतिक गतिविधियों का बढ़ता तापमान

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह हमला आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में रणनीतिक है। 294 सदस्यीय विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस चार सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि एक सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। 16 मार्च को होने वाले इन चुनावों के साथ पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस ने अपने चयन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों, प्रशासनिक अनुभव और सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व के व्यापक संयोजन को आगे बढ़ाना चाहती है।