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तृणमूल कांग्रेस को मिला बड़ा झटका, सुखेंदु शेखर रॉय ने दिया इस्तीफा

तृणमूल कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है जब वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। यह घटना उस समय हुई जब ममता बनर्जी दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल थीं। रॉय ने अपने इस्तीफे में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के परिणामों का जिक्र करते हुए पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल उठाए। उनका यह कदम TMC के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
 

सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा

विपक्षी गठबंधन INDIA की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान तृणमूल कांग्रेस को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और तीन बार के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा की सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यसभा स्पीकर को सौंपने के बाद इसकी एक प्रति TMC प्रमुख ममता बनर्जी को ईमेल और WhatsApp के माध्यम से भेजी।


राजनीतिक हलचल

इस इस्तीफे ने न केवल TMC बल्कि विपक्षी राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है, खासकर जब ममता बनर्जी दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल थीं।



बैठक के दौरान इस्तीफे की खबर

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में विपक्षी दलों की बैठक चल रही थी, जहां बीजेपी के खिलाफ रणनीति पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे की खबर आई, जिससे TMC नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है और पार्टी के आंतरिक हालात पर नए सवाल उठने लगे हैं।


इस्तीफे का कारण

अपने इस्तीफे में, सुखेंदु शेखर रॉय ने हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों ने 15 वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस पर विश्वास नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। रॉय ने कहा कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया और नई सरकार को स्पष्ट जनादेश दिया। उन्होंने लोगों के फैसले का सम्मान करते हुए पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।


राज्यसभा में अनुभव

सुखेंदु शेखर रॉय का पार्टी छोड़ना ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा नुकसान है। वह 2011 में पहली बार राज्यसभा सांसद बने थे और उनके अनुभव और वफादारी के कारण तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें लगातार तीन बार राज्यसभा भेजा। उन्हें संसद में TMC का सबसे मजबूत चेहरा माना जाता था। लेकिन हाल के समय में पार्टी के अंदर उनकी स्थिति कमजोर हो गई थी, जिसके चलते उन्होंने यह बड़ा राजनीतिक कदम उठाने का निर्णय लिया।