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तमिलनाडु में मंत्रियों के शपथ ग्रहण पर राजकीय गीत को लेकर विवाद

तमिलनाडु में हाल ही में हुए मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राजकीय गीत 'तमिल थाई वाझथु' को बजाने के क्रम को लेकर एक नया विवाद उत्पन्न हुआ है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस पर आपत्ति जताई है, यह कहते हुए कि सरकारी समारोहों में पारंपरिक रूप से तमिल राष्ट्रगान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस विवाद ने राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच की स्थिति को भी उजागर किया है। जानें इस मुद्दे पर नेताओं की प्रतिक्रियाएँ और राजनीतिक परिदृश्य में इसके प्रभाव।
 

राजकीय गीत के क्रम पर उठे सवाल

गुरुवार को तमिलनाडु में लोक भवन में नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राजकीय गीत 'तमिल थाई वाझथु' को बजाने के क्रम को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। इस विवाद का मुख्य कारण वंदे मातरम और राष्ट्रगान के बाद गाए जाने वाले मंगलाचरण गीत का क्रम है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम के नेताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकारी समारोहों की शुरुआत में पारंपरिक रूप से तमिल राष्ट्रगान 'थाई वाझथु' गाया जाता रहा है।


पिछले विवादों की याद

इससे पहले, 10 मई को मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में भी इसी तरह का विवाद उत्पन्न हुआ था, जब कथित तौर पर 'वंदे मातरम' और 'जन गण मन' के बाद तमिल राष्ट्रगान गाया गया था। सीपीआई के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने कहा कि राज्यपाल को तमिल राष्ट्रगान को प्राथमिकता देनी चाहिए और तमिल जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।


राज्यपाल से अपेक्षाएँ

वीरपांडियन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राज्यपाल को तमिल राष्ट्रगान को प्राथमिकता देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी राष्ट्रगान का सम्मान करती है, लेकिन सरकारी कार्यक्रमों में तमिल राष्ट्रगान को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।


राज्य सरकार का बचाव

सीपीआई(एम) के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने कहा कि जब मुख्यमंत्री के समक्ष तमिल गीत 'थाई वाझथु' को अंत में गाए जाने का मुद्दा उठाया गया, तो उन्होंने प्रशासनिक प्रोटोकॉल का स्पष्टीकरण दिया। वहीं, डीएमके प्रवक्ता कनिमोझी एनवीएन सोमू ने आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम तमिल भाषा और पहचान के प्रति अनादर को दर्शाता है।


राज्य सरकार की स्थिति

नव नियुक्त टीवीके मंत्री एन मैरी विल्सन ने राज्य सरकार का बचाव करते हुए कहा कि कार्यक्रम की व्यवस्था पूरी तरह से उनके हाथ में नहीं थी। वित्त मंत्री ने बताया कि दोनों कार्यक्रम (10 मई और 21 मई के शपथ ग्रहण समारोह) राज्यपाल कार्यालय द्वारा आयोजित किए गए थे।