तमिलनाडु में ऑटो ड्राइवर की चुनावी जीत ने बदल दी राजनीति की धारा
एक आम आदमी की असाधारण जीत
एक नेता ने 35 वर्षों तक अपनी सीट पर राज किया है, लेकिन चुनावों में एक नया हीरो सामने आया है। एक ऑटो ड्राइवर ने चुनावी मैदान में कदम रखा और जनादेश उसके पक्ष में आ गया। यह कहानी किसी फिल्म की तरह लग सकती है, लेकिन यह पूरी तरह सच है। तमिलनाडु में जब प्रमुख पार्टियों के वोटों में कमी आई, तो चर्चा केवल उन्हें हराने वाली पार्टी की नहीं हुई। थलापति विजय की पार्टी, टीवीके, ने रॉयपुरम सीट पर एक ऑटो ड्राइवर को टिकट दिया, और वह अब एक हीरो बन चुका है। रॉयपुरम को एआईएडीएमके नेता जय कुमार का गढ़ माना जाता था, लेकिन धामू ने इस गढ़ में सेंध लगाई और 55,000 से अधिक वोट प्राप्त किए। जय कुमार इस बार दूसरे स्थान पर भी नहीं टिक सके.
धामू की यात्रा और विजय का समर्थन
धामू और विजय का संबंध केवल राजनीतिक नहीं है। धामू विजय मक्कल अयक्कम का हिस्सा रहे हैं, जो विजय का फैन क्लब है। धामू का कहना है कि उन्हें एक नया चेहरा माना जा सकता है, लेकिन उनका काम नया नहीं है। कई वर्षों की मेहनत ने चुनावी नींव तैयार की है। विजय की लोकप्रियता का अंदाजा उनकी और धामू की तस्वीर से लगाया जा सकता है, जिसमें दोनों गले मिलते हैं। विजय ने अपने चुनावी वादों में स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया, खासकर मछुआरों के समुदायों के लिए। धामू, जो केवल आठवीं कक्षा पास हैं, खुद को एक साधारण ऑटो ड्राइवर मानते हैं और कहते हैं कि असली ब्रांड विजय हैं।
टीवीके की राजनीतिक सफलता
सूत्रों के अनुसार, विजय की पार्टी, तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके), ने तमिलनाडु के राज्यपाल से मुलाकात का समय मांगा है ताकि सरकार गठन पर चर्चा की जा सके। पार्टी ने 108 सीटें जीतकर शानदार शुरुआत की, लेकिन बहुमत से 10 सीटें कम रह गईं। इसके चलते चुनाव के बाद गहन बातचीत शुरू हो गई है। विजय नवनिर्वाचित विधायकों से मिलने के लिए टीवीके कार्यालय जाएंगे। सभी 234 निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना के बाद, टीवीके ने 108 सीटें हासिल कीं। एमके स्टालिन की डीएमके 59 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि एआईएडीएमके 47 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही।
संभावित सहयोगियों के साथ बातचीत
टीवीके ने बहुमत के अंतर को पाटने के लिए संभावित सहयोगियों से संपर्क किया है। खबरों के अनुसार, कांग्रेस और पीएमके टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करने के लिए तैयार हैं, और दोनों दल दो-दो मंत्री पद मांग रहे हैं। वामपंथी दल भी आंतरिक विचार-विमर्श कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।