तमिलनाडु में उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी पर बीजेपी का स्वागत
तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी पर बीजेपी ने स्वागत किया है, जबकि DMK इसे राजनीतिक प्रेरणा से प्रेरित मानती है। स्टालिन की विवादास्पद टिप्पणियों के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ FIR दर्ज की। इस मामले ने राजनीतिक हंगामा मचाया है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। DMK ने इसे विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश बताया है। पूरी जानकारी के लिए पढ़ें।
Aug 4, 2026, 12:45 IST
उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी का स्वागत
भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी का स्वागत किया। स्टालिन ने तंजावुर में DMK की एक रैली के दौरान अभिनेत्री तृषा के बारे में विवादास्पद टिप्पणी की थी। पार्टी के IT सेल प्रमुख अमित मालवीय ने 'X' प्लेटफॉर्म पर कहा कि स्टालिन के साथ ऐसा होना स्वाभाविक था। उन्होंने कहा कि जिसने सनातन धर्म का अपमान किया, उसे एक महिला के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
तमिलनाडु बीजेपी के मीडिया कोऑर्डिनेटर नारायणन तिरुपति ने भी इस बात को दोहराया कि यह मामला अदालत में तय होगा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है या महिलाओं की गरिमा का उल्लंघन। यह विवाद तंजावुर में कावेरी नदी के पानी के मुद्दे पर DMK के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ, जहाँ स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर तीखा हमला किया। अपने भाषण में, उन्होंने कुछ ऐसी बातें कहीं जिन्हें सत्ताधारी TVK ने अपमानजनक माना।
पुलिस कार्रवाई और DMK की प्रतिक्रिया
TVK के पदाधिकारियों की शिकायतों के बाद, पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कई धाराओं के तहत FIR दर्ज की, जिसमें महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने और दुश्मनी को बढ़ावा देने से संबंधित धाराएँ शामिल हैं। TVK ने राष्ट्रीय महिला आयोग से भी संपर्क किया है और DMK नेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। गिरफ्तारी की आशंका के चलते, DMK नेता ने मद्रास हाई कोर्ट में अग्रिम ज़मानत के लिए याचिका दायर की, लेकिन मंगलवार को चेन्नई पुलिस ने उन्हें कई DMK कार्यकर्ताओं के साथ हिरासत में ले लिया।
DMK का राजनीतिक आरोप
DMK ने इस मामले को राजनीतिक प्रेरणा से प्रेरित बताया है। पार्टी के नेताओं ने विजय सरकार पर पुलिस कार्रवाई के माध्यम से विपक्ष की आवाज़ को दबाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह भाषण कावेरी मुद्दे, किसानों के विरोध-प्रदर्शन और राज्य के कामकाज से संबंधित राजनीतिक आलोचना थी। DMK ने FIR के समय पर भी सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि यह TVK के सत्ता में आने के बाद से विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है।