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तमिलनाडु ने पेश की नई जहाज निर्माण नीति 2026, वैश्विक समुद्री अर्थव्यवस्था में बनेगा केंद्र

तमिलनाडु सरकार ने बुधवार को अपनी नई जहाज निर्माण नीति 2026 का अनावरण किया, जिसका लक्ष्य राज्य में विश्वस्तरीय जहाज निर्माण क्लस्टर स्थापित करना है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस नीति के साथ-साथ एमआरएफ टायर्स के साथ एक समझौता ज्ञापन का भी उल्लेख किया, जिसके तहत शिवगंगा जिले में नई टायर निर्माण सुविधा स्थापित की जाएगी। उद्योग मंत्री टीआरबी राजा ने इस नीति को राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था के लिए एक नया अध्याय बताया। यह नीति स्थिरता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार प्रथाओं पर जोर देती है, जिससे तमिलनाडु वैश्विक नीली अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख केंद्र बन सके।
 

नई जहाज निर्माण नीति का अनावरण

तमिलनाडु सरकार ने बुधवार को अपनी जहाज निर्माण नीति 2026 का अनावरण किया। इस नीति का उद्देश्य राज्य में एक विश्वस्तरीय जहाज निर्माण क्लस्टर स्थापित करना है, साथ ही जहाज मरम्मत और समुद्री इंजीनियरिंग जैसे अन्य संबंधित क्षेत्रों को शामिल करते हुए एक मजबूत समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस नीति का अनावरण किया, जिसमें शिवगंगा जिले के इलुप्पैकुडी में एक नई टायर निर्माण सुविधा स्थापित करने के लिए एमआरएफ टायर्स के साथ एक समझौता ज्ञापन भी शामिल है।


मुख्यमंत्री का बयान

स्टालिन ने X पर एक पोस्ट में कहा कि इस समझौते से तमिलनाडु की विनिर्माण क्षमता को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि 5300 करोड़ रुपये के निवेश से नई टायर निर्माण सुविधा स्थापित की जाएगी, जिससे लगभग 1000 नए रोजगार सृजित होंगे। इसके साथ ही, 'तमिलनाडु जहाज निर्माण नीति 2026' का उद्देश्य समुद्री उद्योग को मजबूत करना है, जिससे राज्य वैश्विक नीली अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख केंद्र बन सके।


उद्योग मंत्री का दृष्टिकोण

तमिलनाडु के उद्योग मंत्री टीआरबी राजा ने कहा कि यह नीति राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था के लिए एक नया अध्याय है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय जहाज निर्माण और भारी उद्योग पार्क (एनएसएचआईपी) के माध्यम से राज्य में विश्वस्तरीय जहाज निर्माण क्लस्टर विकसित किया जाएगा, जो बड़े वाणिज्यिक जहाजों, रक्षा नौकाओं, पनडुब्बियों और अपतटीय संरचनाओं के निर्माण में सक्षम होगा।


प्रोत्साहन और स्थिरता पर जोर

राजा ने बताया कि यह नीति वैश्विक शिपयार्डों और समुद्री निर्माताओं को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है। इसमें दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न उपाय शामिल हैं, जैसे कि इक्विटी भागीदारी और पूंजी समर्थन। स्थिरता इस पहल का मुख्य केंद्र होगा, जिसमें हरित जहाज पुनर्चक्रण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार निर्माण प्रथाओं पर जोर दिया जाएगा।