तमिलनाडु चुनावों में विजय की पार्टी को बड़ा झटका, सरकार गठन की चुनौतियाँ
राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव
तमिलनाडु के चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद, विजय की तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) को एक महत्वपूर्ण झटका लग सकता है। राजनीतिक हलकों में डीएमके और एआईएडीएमके के बीच एक अभूतपूर्व गठबंधन की चर्चा हो रही है, जबकि टीवीके राज्यपाल से बहुमत साबित करने के लिए आवश्यक संख्या जुटाने में जुटी है। राज्यपाल ने पिछले दो दिनों में विजय से हुई मुलाकातों में इस बात को स्पष्ट किया है।
राज्यपाल से मुलाकात
गुरुवार को विजय ने राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से दूसरी बार मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार, राज्यपाल ने उन्हें बताया कि टीवीके के पास विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए आवश्यक 118 विधायकों का समर्थन नहीं है। उन्होंने विजय को पर्याप्त संख्या में विधायकों के साथ लौटने के लिए कहा। इसके तुरंत बाद, डीएमके ने अपने विधायक दल की बैठक बुलाई, जबकि एआईएडीएमके के लगभग 40 विधायक पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में ठहरे रहे।
डीएमके की रणनीति
डीएमके की बैठक के बाद, पार्टी नेताओं ने कहा कि जनता ने उन्हें विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया है, लेकिन पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन को आवश्यकतानुसार राजनीतिक निर्णय लेने का अधिकार होगा। इस बयान ने टीवीके को सत्ता से बाहर रखने के लिए डीएमके और एआईएडीएमके के बीच संभावित गठबंधन की अटकलों को फिर से जन्म दिया। इस बीच, रिसॉर्ट में हुई बैठक के बाद, एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी ने पार्टी विधायकों से एकजुट रहने का आग्रह किया।
टीवीके की चिंताएँ
राज्यपाल कार्यालय की ओर से हो रही देरी और दो प्रमुख द्रविड़ दलों के बयानों के कारण टीवीके को राजनीतिक साजिश का संदेह हो रहा है। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, यदि डीएमके और एआईएडीएमके अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार बनाते हैं, तो टीवीके विधायक सामूहिक इस्तीफे पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इसे राज्यपाल और प्रतिद्वंद्वी द्रविड़ दलों पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।