तमिल फिल्म 'जन नायकन' पर रोक को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा
राजनीतिक बवाल का कारण
केंद्र सरकार द्वारा तमिल फिल्म 'जन नायकन' पर रोक लगाने के प्रयासों ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पर तमिल संस्कृति पर हमला करने का आरोप लगाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी दी है कि तमिल जनता की आवाज को दबाना संभव नहीं है। मंगलवार को इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार को चुनौती दी। उनका कहना है कि मंत्रालय द्वारा 'जन नायकन' पर रोक लगाना तमिल संस्कृति पर सीधा हमला है।
फिल्म पर रोक का कारण
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म को मंजूरी देने में रुकावट डालने के लिए कदम उठाए। हालांकि, केंद्र ने अपनी आपत्तियों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, प्रमाणन मानदंडों और विषयवस्तु संबंधी दिशानिर्देशों को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई थीं। खासकर फिल्म के राजनीतिक संदर्भ और वर्तमान शासन के साथ उसके कथित समानताओं को लेकर।
सांस्कृतिक अभिव्यक्ति पर प्रभाव
आधिकारिक स्पष्टीकरण की कमी ने अटकलों और आलोचनाओं को बढ़ावा दिया है, विशेषकर तमिलनाडु में, जहां सिनेमा राजनीतिक विचारों और सामाजिक आंदोलनों से गहराई से जुड़ा हुआ है। 'जन नायकन', जिसका अर्थ है 'जनता का नेता', सामाजिक न्याय और राजनीतिक जवाबदेही पर आधारित है, और यह रिलीज से पहले ही ध्यान आकर्षित कर चुका था। इसके समर्थकों का कहना है कि इसके विषय तमिल राजनीतिक इतिहास और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़े हुए हैं।
सेंसरशिप का आरोप
विपक्षी नेताओं और फिल्म उद्योग के सदस्यों ने फिल्म पर रोक लगाने के इस कदम को सेंसरशिप करार दिया है। उनका कहना है कि यह कलात्मक स्वतंत्रता को कमजोर करता है और भारत के सबसे राजनीतिक रूप से जागरूक फिल्म उद्योगों में सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को सीमित करता है। कांग्रेस नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष की ओर से यह आलोचना बढ़ रही है कि नियामक तंत्रों का उपयोग राजनीतिक विचारों और असहमति की आवाज़ों को सांस्कृतिक मंचों के माध्यम से नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है।