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डॉ. मोहन भागवत ने तरुण विजय की पुस्तक 'भगवा उत्कर्ष' का विमोचन किया

डॉ. मोहन भागवत ने नई दिल्ली में तरुण विजय की पुस्तक 'भगवा उत्कर्ष' का विमोचन किया। यह पुस्तक भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण और उपनिवेशवाद-मुक्ति की कहानी को प्रस्तुत करती है। लेखक ने इसे हिंदू आस्था की पुनः प्रतिष्ठा का दस्तावेज बताया है। समारोह में कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया और पुस्तक की सराहना की। जानें इस पुस्तक में क्या खास है और यह कैसे भारतीय समाज को प्रभावित कर सकती है।
 

पुस्तक विमोचन समारोह का आयोजन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने आज प्रतिष्ठित लेखक और विचारक तरुण विजय की नई पुस्तक “Saffron Surge: Making of a Brave, New Bharat” (भगवा उत्कर्ष - एक नवीन साहसी भारत का उदय) का औपचारिक विमोचन किया। यह समारोह संघ मुख्यालय केशव कुंज, नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें बौद्धिक जगत के प्रमुख व्यक्तित्व, कानून के विशेषज्ञ और राष्ट्र के प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। डॉ. भागवत के साथ मंच पर सुप्रीम कोर्ट के वकील महेश जेठमलानी और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य, प्रसिद्ध इतिहासकार एवं अर्थशास्त्री संजीव सान्याल भी उपस्थित थे। दिल्ली प्रांत संघचालक डॉ. अनिल अग्रवाल और हरानंद पब्लिशर्स के आशीष आनंद भी इस अवसर पर मौजूद थे।


पुस्तक का महत्व और विषयवस्तु

“Saffron Surge” एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो भारतीय समाज के उपनिवेशवाद-मुक्ति की कहानी को प्रस्तुत करता है। पूर्व सांसद और पांचजन्य के पूर्व संपादक तरुण विजय ने इस पुस्तक में बताया है कि संघ शताब्दी का यह समय वास्तव में मुग़ल काल के अंत का आरंभ है, जब हिंदू आस्था और सभ्यता की पुनः प्रतिष्ठा हो रही है।


पुस्तक की प्रस्तावना और समीक्षाएँ

इस पुस्तक की प्रस्तावना डॉ. मोहन भागवत ने लिखी है, जिसमें उन्होंने इसे “विश्लेषण और सुझावों सहित एक सचल भारत गाथा” कहा है। उन्होंने इसे उन सभी के लिए आवश्यक पढ़ने की सामग्री बताया है, जो भारत को उसकी गौरव और आत्मसम्मान दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबले ने भी पुस्तक को प्रेरणादायक बताया है और इसे भारत के वैचारिक परिवर्तन का “रोमांचक समकालीन इतिहास” करार दिया है।


लेखक की दृष्टि

विमोचन समारोह में तरुण विजय ने कहा, “वैश्विक हिंदू का उदय — सभ्यता मूलक मानस के वापसी से लेकर विक्रम-1 की वैज्ञानिक प्रतिभा तक — ही भगवा उत्कर्ष है। यह सनातन धर्म की अजेय यात्रा है, जो सार्वभौमिक प्रेम, सद्भाव और भिन्न विचारों की स्वीकार्यता पर आधारित है। इस पुनरोदय ने हमारे राष्ट्र और सभ्यता के विरोधियों को हिला दिया है।”