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डॉ. अंकित पांडेय को मिली विद्या वाचस्पति की उपाधि, मीडिया शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान

भोपाल में डॉ. अंकित पांडेय को विद्या वाचस्पति की उपाधि प्रदान की गई। यह उपाधि प्रो. केजी सुरेश के योगदान पर आधारित उनके शोध के लिए है। समारोह में कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। डॉ. पांडेय ने इसे गुरु-शिष्य परंपरा का उदाहरण बताया और इसे मीडिया शिक्षा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना। जानें उनके शोध के बारे में और प्रो. सुरेश के योगदान को।
 

डॉ. अंकित पांडेय की शैक्षणिक उपलब्धि

भोपाल। मीडिया और जनसंचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत डॉ. अंकित पांडेय को विद्या वाचस्पति (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई। यह सम्मान मध्य प्रदेश के माननीय राज्यपाल मंगूभाई पटेल द्वारा एक भव्य समारोह में दिया गया। उनका शोध देश के प्रसिद्ध मीडिया शिक्षाविद् प्रो. (डॉ.) केजी सुरेश के व्यक्तित्व और उनके तीन दशकों से अधिक के योगदान पर आधारित है।


समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस अवसर पर अभिनेता और सांसद रवि किशन, राज्यसभा सांसद एवं भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला सहित कई अन्य प्रमुख व्यक्ति मौजूद थे।


शोध का विषय और योगदान

डॉ. अंकित पांडेय के शोध में प्रो. केजी सुरेश के पत्रकारिता, मीडिया शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय संवाद और संस्थागत नेतृत्व के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत वर्णन किया गया है। शोध में यह भी बताया गया है कि प्रो. सुरेश ने भारत के अलावा पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल और चीन में सक्रिय संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए जमीनी पत्रकारिता को नई दिशा दी। उनकी रिपोर्टिंग ने सामाजिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को समझने में एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया।


प्रो. सुरेश का योगदान

प्रो. सुरेश ने दूरदर्शन में सलाहकार संपादक के रूप में कार्य करते हुए प्रसारण पत्रकारिता को मजबूत किया। इसके अलावा, भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक के रूप में उन्होंने संस्थान को ‘डीम्ड विश्वविद्यालय’ का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भाषाई पत्रकारिता को बढ़ावा दिया।


नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलगुरु के रूप में उन्होंने भोपाल और रीवा में नए परिसरों की स्थापना की और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया। उन्होंने नई पीढ़ी को मूल्य-आधारित पत्रकारिता की दिशा में निरंतर मार्गदर्शन दिया।


गुरु-शिष्य परंपरा का उदाहरण

डॉ. अंकित पांडेय ने अपने शोध को केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं माना, बल्कि इसे गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह शोध उनके गुरु के प्रति सम्मान और समर्पण की अभिव्यक्ति है। प्रो. केजी सुरेश के विचारों और नैतिक मूल्यों को समझना उनके लिए एक निरंतर सीखने की प्रक्रिया रही है, जिसे उन्होंने अपने शोध के माध्यम से व्यक्त करने का प्रयास किया है।


उपाधि का महत्व

समारोह के दौरान डॉ. पांडेय ने कहा कि माननीय राज्यपाल मंगूभाई पटेल, रवि किशन, राजीव शुक्ला और मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री कृष्णा गौर जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों के हाथों यह उपाधि प्राप्त करना उनके लिए आशीर्वाद और प्रेरणा का स्रोत है।


मीडिया शिक्षा में योगदान

यह उपलब्धि न केवल डॉ. अंकित पांडेय के व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम है, बल्कि मीडिया शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में भी स्थापित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के शोध कार्य भविष्य में पत्रकारिता के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे और गुरु-शिष्य परंपरा को और मजबूत करेंगे।