डीके शिवकुमार का केंद्र सरकार पर आरोप: दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व घटाने का प्रयास
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री का बयान
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त की, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या को बढ़ाकर 850 करने और 2026 से पहले जनगणना के आधार पर परिसीमन करने की बात कही गई है। उन्होंने इस कदम को दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम करने के रूप में देखा। शिवकुमार ने X पर एक पोस्ट में कहा कि यह राजनीतिक पुनर्गठन के समान है, जिससे दक्षिण की आवाज़ कमजोर हो सकती है, जबकि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को अनुचित लाभ मिलेगा। उन्होंने इसे प्रगति और सुशासन को दंडित करने वाला बताया और कहा कि इससे दक्षिणी राज्य राजनीतिक रूप से हाशिए पर चले जाएंगे।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस का रुख
शिवकुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी विधानमंडल में महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन करती है और इसका श्रेय पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को दिया। हालांकि, उन्होंने महिला आरक्षण अधिनियम के कार्यान्वयन को परिसीमन या सीटों के विस्तार से जोड़ने का विरोध किया, इसे अनुचित राजनीतिक एजेंडा बताया। उन्होंने इस मुद्दे पर समय और पारदर्शिता की कमी पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में इस तरह के बड़े बदलाव जल्दबाजी में नहीं होने चाहिए।
केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर चिंता
शिवकुमार ने कहा कि केंद्र को महिला सशक्तिकरण के नाम पर इस एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह का कोई भी कदम अस्वीकार्य होगा। उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिणी राज्य संघवाद की भावना की रक्षा करने और प्रतिनिधित्व में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एकजुट रहेंगे। नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, जो परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।
केंद्र सरकार का प्रस्ताव
खबरों के अनुसार, केंद्र सरकार 2029 के आम चुनावों से पहले इस आरक्षण को लागू करने के लिए संवैधानिक संशोधनों और मौजूदा ढांचे में बदलाव पर विचार कर रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है, जिसमें से 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटित की जाएंगी।