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ठाणे में शिवसेना पार्षद के खिलाफ पुलिस जांच में तेजी, हाईकोर्ट ने दी सुनवाई की तारीख

महाराष्ट्र पुलिस ने बंबई उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया है कि वह ठाणे जिले के डोंबिवली में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे के खिलाफ जांच में तेजी लाएगी। यह मामला चिकित्सकों के साथ मारपीट से जुड़ा है, जिसमें म्हात्रे को पहले गिरफ्तार किया गया था। उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत पर रोक लगा दी है और अगली सुनवाई छह अगस्त को होगी। इस घटना ने समाज में भारी आक्रोश पैदा किया है।
 

पुलिस ने हाईकोर्ट को दी जांच में तेजी लाने की आश्वासन

महाराष्ट्र पुलिस ने शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय को सूचित किया कि वह ठाणे जिले के डोंबिवली स्थित नगर निगम अस्पताल में चिकित्सकों के साथ मारपीट के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे के मामले में तेजी लाएगी। पुलिस ने वादा किया है कि वह इस जांच को अगले दो हफ्तों में पूरा कर लेगी। यह घटना छह जुलाई को हुई थी, जिसके बाद म्हात्रे को दो दिन बाद गिरफ्तार किया गया था। एक मजिस्ट्रेट अदालत ने 14 जुलाई को उन्हें जमानत दी, लेकिन चार दिन बाद उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जमानत पर रोक लगा दी।


म्हात्रे का आत्मसमर्पण और जमानत पर सुनवाई

उच्च न्यायालय के निर्देश पर, म्हात्रे ने प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण किया और वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में हैं। उनके वकील आबाद पोंडा ने अदालत से अनुरोध किया कि उनके मुवक्किल को कड़ी शर्तों के साथ जेल से रिहा किया जाए और वह जांच पूरी होने तक महाराष्ट्र से बाहर रहने को भी तैयार हैं। हालांकि, अदालत की मदद के लिए नियुक्त वरिष्ठ वकील अशोक मुंडार्गी और 'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन' के प्रतिनिधि एस यू कामदार ने इसका विरोध किया।


पुलिस जांच की प्रगति

महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने खंडपीठ को बताया कि पिछले हफ्ते अदालत के आदेश के अनुसार, पुलिस के उपायुक्त अब जांच का कार्य संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले दर्ज किए गए नौ लोगों के अलावा 17 और लोगों के बयान लिए जा चुके हैं, और 10 और गवाहों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। पुलिस ने जांच में तेजी लाने का प्रयास किया है और इसे दो हफ्तों के भीतर पूरा करने की योजना बनाई है।


मारपीट की घटना का विवरण

इस मामले की अगली सुनवाई छह अगस्त को होगी, जिसमें म्हात्रे की जमानत की अर्ज़ी पर विचार किया जाएगा। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम के शास्त्री नगर अस्पताल में दो चिकित्सकों और नर्सों के साथ कथित तौर पर मारपीट करने के आरोप में पार्षद और उनके सहयोगियों को छह जुलाई की रात गिरफ्तार किया गया था। यह घटना तब हुई जब एक परिवार को नवजात शिशु को दूसरे अस्पताल में ले जाने की सलाह दी गई थी। इस मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।