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ट्राइग्लिसराइड्स के बढ़ने से दिल को खतरा: जानें नियंत्रण के उपाय

ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ा हुआ स्तर दिल की सेहत के लिए गंभीर खतरा हो सकता है। यदि आपका ट्राइग्लिसराइड्स स्तर 300 mg/dL से अधिक है, तो इसे नियंत्रित करने के लिए सही डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव आवश्यक हैं। जानें विशेषज्ञों से ट्राइग्लिसराइड्स के बढ़ने के कारण और इसे कम करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।
 

दिल की सेहत में ट्राइग्लिसराइड्स की भूमिका

जब दिल की सेहत की चर्चा होती है, तो अक्सर कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। लेकिन एक और महत्वपूर्ण फैक्टर, जिसे ट्राइग्लिसराइड्स कहा जाता है, भी खून में मौजूद होता है। कार्डियोलॉजिस्ट्स के अनुसार, यदि ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर 300 mg/dL से अधिक हो जाता है, तो यह दिल के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। अच्छी बात यह है कि उचित चिकित्सा सलाह, अनुशासन और सही डाइट प्लान से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।


ट्राइग्लिसराइड्स के बढ़ने के कारण

खराब आहार का सेवन ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को बढ़ा सकता है। प्रोसेस्ड फूड, तले हुए खाद्य पदार्थ, अधिक चीनी और मिठाइयों का सेवन शरीर में अतिरिक्त कैलोरी को ट्राइग्लिसराइड्स में बदलने का कारण बनता है, जो दिल के लिए हानिकारक है।


ट्राइग्लिसराइड्स 300 से अधिक होने पर डाइट में बदलाव

चीनी और मीठे पेय से बचें: अतिरिक्त चीनी ट्राइग्लिसराइड्स में परिवर्तित हो सकती है। इसलिए, सॉफ्ट ड्रिंक्स और मिठाइयों का सेवन कम करें। इसके बजाय, पानी या नींबू पानी का सेवन करें।


रोजाना 30 से 45 मिनट चलें: नियमित शारीरिक गतिविधि अतिरिक्त फैट को ऊर्जा में बदलने में मदद करती है।


सफेद चावल और मैदा का सेवन कम करें: रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स ट्राइग्लिसराइड्स को बढ़ा सकते हैं। इसके बजाय, ओट्स और मल्टीग्रेन आटे का सेवन करें।


फाइबर युक्त आहार लें: हरी सब्जियां और फल ट्राइग्लिसराइड्स को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं।


देर रात खाना खाने से बचें: सोने से 3 घंटे पहले खाना खाएं।


तले हुए और पैकेज्ड फूड से दूर रहें: ऐसे खाद्य पदार्थों में उच्च फैट होता है।


अच्छी नींद और तनाव प्रबंधन: रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लें और तनाव को कम करने के उपाय करें।


डॉक्टर की सलाह कब लें?

कुछ लोगों में ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ना जेनेटिक कारणों से हो सकता है। ऐसे मामलों में, केवल लाइफस्टाइल में बदलाव पर्याप्त नहीं होते और डॉक्टर की सलाह पर दवाओं का सेवन आवश्यक हो सकता है।