ट्रंप का नाम केनेडी सेंटर से हटाने का आदेश, न्यायालय ने रोका नवीनीकरण
न्यायालय का निर्णय
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का नाम केनेडी सेंटर से हटाने का आदेश एक संघीय न्यायाधीश द्वारा शुक्रवार को जारी किया गया। इस आदेश ने उस प्रयास को रोक दिया, जिसमें इस प्रसिद्ध वाशिंगटन कला स्थल का नाम बदलने की योजना बनाई गई थी। इसके साथ ही, इस वर्ष के अंत में नवीनीकरण कार्य के लिए भवन को बंद करने की योजना भी रद्द कर दी गई।
न्यायाधीश का तर्क
यू.एस. डिस्ट्रिक्ट जज क्रिस्टोफर आर. कूपर ने 94 पृष्ठों के अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केनेडी सेंटर का नामकरण कांग्रेस ने किया था, और इसलिए इसे केवल कांग्रेस ही बदल सकती है। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने इस निर्णय को अपने हाथ में लेकर अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया। कूपर ने 1964 में वापस जाकर यह बताया कि उस वर्ष कांग्रेस ने इस भवन का नाम राष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र से जॉन एफ. केनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स में बदल दिया था।
स्थिति तक कैसे पहुंचे
यह कहानी फरवरी 2025 से शुरू होती है, जब ट्रंप ने केनेडी सेंटर के कई बोर्ड सदस्यों को हटा दिया और अपने प्रशासन के अनुकूल नए सदस्यों को नियुक्त किया। नए सदस्यों में पूर्व अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर शामिल थे। नए बोर्ड ने जल्दी ही ट्रंप को अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया और उनके नाम को भवन से जोड़ने की स्वीकृति दी।
निर्णय का कारण
शुक्रवार के आदेश के पीछे का मुकदमा ओहियो से डेमोक्रेट प्रतिनिधि जॉयस बीटी द्वारा दायर किया गया था। उनका आरोप था कि 2025 में केनेडी सेंटर के नियमों में चुपचाप बदलाव करके उनके मतदान अधिकारों को अवैध रूप से छीन लिया गया। अदालत ने उनके पक्ष में निर्णय दिया, जिससे न केवल उनके व्यक्तिगत स्थान पर प्रभाव पड़ा, बल्कि नाम परिवर्तन और बंद करने की प्रक्रिया को भी रोक दिया।