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टीएमसी सांसदों की बगावत: ममता बनर्जी के वफादारों ने उठाई आवाज़

तृणमूल कांग्रेस के 22 सांसदों की विद्रोह की खबरों के बीच, ममता बनर्जी के वफादार सांसदों ने दिल्ली में मोर्चा संभाला है। कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की और बागी सांसदों पर तीखा हमला किया। उन्होंने संविधान के तहत पार्टी के विभाजन को अस्वीकार किया और कहा कि यह नैतिक कमजोरी को दर्शाता है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी।
 

दिल्ली में टीएमसी सांसदों की सक्रियता

तृणमूल कांग्रेस के 22 सांसदों की विद्रोह की खबरों के बीच, ममता बनर्जी के समर्थक सांसदों ने दिल्ली में मोर्चा संभाल लिया है। रविवार को टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष अचानक लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के निवास पर पहुंचे। जब मीडिया ने कीर्ति आजाद से पूछा कि क्या उनके पास स्पीकर से मिलने का पूर्व निर्धारित समय है, तो उन्होंने उत्तर दिया, "अगर सर हमें समय देंगे, तो हम अंदर जाएंगे। अन्यथा, हम वापस लौट जाएंगे।"


संविधान के खिलाफ है अलग गुट बनाना

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने लोकसभा स्पीकर के कार्यालय को पत्र सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए बागी गुट पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, "हमने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र दिया है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि टीएमसी एक अटूट और अविभाज्य पार्टी है। आप लोकसभा के भीतर कोई भी अलग गुट नहीं बना सकते। यह पूरी तरह से संविधान के खिलाफ है। जो लोग टीएमसी को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं और संसद में अलग समूह बनाने की कोशिश कर रहे हैं, कानून इसकी अनुमति नहीं देता।"


बागी सांसदों की नैतिक कमजोरी

सागरिका ने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा, "यह आपकी नैतिक कमजोरी को दर्शाता है कि जब पार्टी चुनाव हारती है, तो आप उस पार्टी, नेता और चुनाव चिह्न को छोड़ देते हैं, जिसके आधार पर आप चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं।"


कीर्ति आजाद का 10वीं अनुसूची का संदर्भ

पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कानूनी नियमों का हवाला देते हुए कहा, "यह मामला पूरी तरह स्पष्ट है। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने इस पर निर्णय दिया है और संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुच्छेद 4 में भी इसका उल्लेख है कि पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार का विभाजन मान्य नहीं है।"


महाराष्ट्र की राजनीति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र में जो कुछ भी हुआ, वह पूरी तरह गलत था। इसलिए, हम इसी मुद्दे को लेकर एक आवेदन के साथ यहां आए हैं और हमने स्पीकर को अपना पत्र सौंप दिया है। हमें पूरा विश्वास है कि लोकसभा स्पीकर नियमों और देश के संविधान के अनुसार सही निर्णय लेंगे, जैसा कि वे अब तक करते आए हैं।"