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टीएमसी ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी, उच्च न्यायालय में याचिका दायर

ममता बनर्जी की टीएमसी ने विधानसभा अध्यक्ष के ऋताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता मान्यता देने के फैसले को चुनौती देते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की गई है। टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 ने ऋताब्रता का समर्थन किया है, जिससे पार्टी को बड़ा झटका लगा है। साथ ही, सांसद सौगत रॉय ने भाजपा के दल-बदल के प्रस्ताव को ठुकराते हुए टीएमसी के लिए समर्थन की अपील की है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में और अधिक जानकारी।
 

टीएमसी की याचिका पर उच्च न्यायालय में सुनवाई

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विपक्ष के नेता के रूप में ऋताब्रता बनर्जी को मान्यता देने के निर्णय को चुनौती देते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। टीएमसी के वकील ने तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए अदालत को बताया कि 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा का पहला सत्र 18 जून से शुरू होगा। न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने मामले को अत्यावश्यकता के आधार पर सुनने का निर्देश दिया और याचिका पर 11 जून को प्राथमिकता से सुनवाई करने का आदेश दिया।


टीएमसी को बड़ा झटका

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को सूचित किया कि विधानसभा अध्यक्ष इस याचिका में मुख्य प्रतिवादी हैं। टीएमसी को एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि उसके 80 विधायकों में से 58 ने ऋताब्रता बनर्जी का समर्थन किया है, जबकि पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय को अस्वीकार कर दिया गया। हालिया विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 207 सीटें जीतीं, जबकि टीएमसी को 80 सीटें मिलीं।


सौगत रॉय का भाजपा के प्रस्ताव को ठुकराना

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने सोमवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के दल-बदल के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उसी पार्टी में रहेंगे जिसके चुनाव चिन्ह पर वे चुने गए थे। रॉय ने विपक्षी इंडिया ब्लॉक से टीएमसी को इस कठिन समय में समर्थन देने की अपील की। उन्होंने कहा, "मुझे भाजपा से पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन मैंने इसे अस्वीकार कर दिया।" रॉय ने यह भी कहा कि टीएमसी लगातार दबाव में है और सहयोगियों का समर्थन इसे मजबूत करेगा।