टाटा ग्रुप में आंतरिक विवाद: बोर्ड मीटिंग में क्या होगा?
टाटा ग्रुप की बोर्ड मीटिंग का महत्व
मंगलवार को टाटा संस की एक महत्वपूर्ण बोर्ड मीटिंग आयोजित की जाएगी। यह मीटिंग उस समय हो रही है जब टाटा ग्रुप साइरस मिस्त्री के कार्यकाल के बाद से अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट का सामना कर रहा है। इस बार का तनाव टाटा ट्रस्ट्स के भीतर उत्पन्न हुआ है।
टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच का विवाद
टाटा ग्रुप के भीतर की दरारें केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं हैं। इस संघर्ष की जड़ यह है कि टाटा ट्रस्ट्स का टाटा संस पर कितना अधिकार होना चाहिए, और क्या ग्रुप की पुरानी सहमति से चलने वाली व्यवस्था अब टूटने वाली है?
रतन टाटा के बाद का शक्ति संतुलन
रतन टाटा के जाने के बाद टाटा ग्रुप में मौजूदा दौर की शुरुआत हुई। उनके सौतेले भाई नोएल टाटा ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन का पद संभाला। ये ट्रस्ट्स मिलकर टाटा संस के लगभग 66 प्रतिशत शेयरों के मालिक हैं। रतन टाटा के न रहने पर, कई महत्वपूर्ण निर्णय अब ट्रस्टियों की औपचारिक चर्चाओं के माध्यम से लिए जाने लगे हैं।
बोर्ड में प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद
टाटा ट्रस्ट्स की एक मीटिंग में यह तनाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। इस मीटिंग में चर्चा हुई कि विजय सिंह को टाटा संस के बोर्ड में नॉमिनी डायरेक्टर के रूप में बनाए रखा जाए या नहीं। कुछ ट्रस्टियों ने उनके पद पर बने रहने का विरोध किया और मेहली मिस्त्री का समर्थन किया।
गवर्नेंस से जुड़ी चिंताएं
टाटा ट्रस्ट्स के भीतर चर्चाएं अब बोर्ड में प्रतिनिधित्व के मुद्दे से आगे बढ़ गई हैं। नॉमिनी डायरेक्टर्स की भूमिका, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच संवाद, और गवर्नेंस के ढांचे पर बहस चल रही है।
चंद्रशेखरन के कार्यकाल पर चर्चा
फरवरी 2026 में हुई टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में एन. चंद्रशेखरन को चेयरमैन के रूप में तीसरा कार्यकाल देने का निर्णय टल गया। नए व्यवसायों में हो रहे नुकसान और कर्ज के स्तर पर चर्चा के बाद यह मामला स्थगित कर दिया गया।
बोर्ड मीटिंग से क्या उम्मीदें हैं?
इस मीटिंग में चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर चर्चा होने की संभावना नहीं है। इसके बजाय, ग्रुप के निवेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। यह मीटिंग ऐसे समय में हो रही है जब टाटा ग्रुप के अनलिस्टेड व्यवसाय को वित्त वर्ष 2025 में 10,905 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।